Corona Vaccine News: कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक न लेने पर नकारात्मक पहलुओं का करना पड़ सकता है सामना, अध्ययन से मिली जानकारी

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Sumit Singh
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Corona Vaccine News: कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक न लेने पर नकारात्मक पहलुओं का करना पड़ सकता है सामना, अध्ययन से मिली जानकारी

एक अध्ययन से ज्ञात हुआ कि करोना वायरस के पहले वाले व्यस्को में 20% तक एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो जाती है जिन्होंने दूसरे फाइजर या मॉडर्न का टीकाकरण कराया। अध्ययन से, कोविड-19 के कई वेरिएंट्स का विरोध वैक्सीन अच्छे से कर रहे हैं, इसकी जानकारी मिली। कोविड-19 के दोनों खुराका को लेना बहुत जरूरी है। खुराक को लेने के बाद दूसरी खुराक ना लेने पर प्रतिरक्षा एवं एंटीबॉडी प्रतिक्रिया कम हो सकती है। कोवीशिल्ड, कोवैक्सीन, मॉडर्न या फाइजर किसी भी टीके की दूसरी खुराक ना लेने से प्रतिरक्षा शक्ति कमजोर होने की संभावना बनी रहती है।

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी का यह अध्ययन ‘साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ जनरल में प्रकाशित हुआ। इस अध्ययन में वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के महत्व की ओर ध्यान दिया। क्योंकि प्रतिरक्षा शक्ति वक्त के साथ कम होने लगती है, इसके अलावा संक्रामक डेल्टा संस्करण सहित कोविड-19 के सभी रूपों से लड़ने के लिए दूसरा डोज बहुत महत्वपूर्ण है।अध्ययन से इस बात की भी जानकारी मिली की वैक्सीन का पहला डोज SARS-CoV-2 के खिलाफ उच्च स्तर के एंटीबॉडी को उत्पन्न करने में सक्षम नहीं होता, और ना ही वह मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया की गारंटी, टीके की पहली खुराक के लिए देता है।

फार्मोकोलॉजिस्ट अलेक्सिस डेमोन ब्रून एवं जैविक मानव विज्ञानी थॉमस मैकडेड के साथ वैज्ञानिकों की एक टीम ने SARS-CoV-2 के किए गए व्यस्को के पॉजिटिव टेस्ट केवल रक्त के नमूनों का टेस्ट किया गया, जिससे इस बात का पता चले कि मॉडर्न और फाइजर टीके क प्रतिरक्षा लाभ वेरिएंट्स के खिलाफ कितने देर तक चलता और उससे रक्षा करता है।

महामारी के शुरुआती समय में नस्लीय और जातीय रूप से व्यस्को के विभिन्न समुदाय प्रतिभागियों को अध्ययन के लिए चुना गया। इन प्रतिभागियों को पहले प्रयोगशाला में बनाए गए एंटीबॉडी परीक्षण किट का घर में प्रयोग किया गया, टीकाकरण के पहले और दूसरे डोज लेने के दो-तीन सप्ताह बाद और वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के 2 महीने बाद ब्लड सैंपल को जमा किया गया।

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एंटीबॉडी को निष्क्रिय करने के लिए शोधकर्ताओं द्वारा प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया, इस परीक्षण का उद्देश्य इस बात की जानकारी प्राप्त करना था कि वायरस के एसीई 2 रिसेप्टर और स्पाइक प्रोटीन के बीच शरीर में प्रवेश करने वाले वायरस किस प्रकार संक्रमण का कारण बनती हैं। उभरते हुए कोरोनावायरस, दक्षिण अफ्रीका के वैरीअंट बी. 1.1351, यूके के वैरीअंट बी 1.1.7 और ब्राजील का वैरीअंट का परीक्षण करने पर पाया गया कि वायरल वैरीअंट के खिलाफ विरोध का स्तर 67 परसेंट से 92 परसेंट के बीच बहुत कम था।

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वैक्सीन की दूसरी खुराक लेने के 2 महीने बाद नमूनों को परीक्षण के लिए एकत्र किया गया जिसमें 20% एंटीबॉडी प्रतिक्रियाओं में गिरावट देखी गई। मैकडेड ने बताया कि एक बार टीका देने के बाद पूर्व जोखिम वाले लोगों को फिर से टीकाकरण की आवश्यकता नहीं होगी। SARS-CoV-2 के संपर्क में आने पर, कई डॉक्टर और लोगों का मानना है कि पुणे प्रतिरक्षा, संक्रमण के लिए दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि फाइजर या मॉडर्ना टीके की पहले खुराक लेने के बाद दूसरी खुराक नहीं लेते हैं तो यह एक मजबूत एंटीबॉडी प्रतिक्रिया उत्पन्न करने की गारंटी नहीं देता, अतः उचित स्तर के एंटीबॉडी को उत्पन्न करने के लिए दूसरी खुराक का लेना अति आवश्यक है।

टीकाकरण की सुरक्षा को लेकर डेल्टा सहित सभी वेरिएंट्स एक जैसे हैं, संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करते हैं लेकिन वायरस के मूल संस्करण के लिए जिस डिजाइन को तैयार किया गया था, इतनी अधिक सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम नहीं है। प्रतिरक्षा धीरे-धीरे कम होने लगती है जिसके कारण संक्रमण की चपेट में आने की संभावना रह जाती है। डेल्टा प्लस कमजोर प्रतिरक्षा, वैक्सीनेशन के पहले लहर के बीच हैं, अतः दूसरी खुराक को नहीं लेने पर कई नकारात्मक पहलू को देखा जा सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार के वैक्सिन के सभी खुराको को लेना बहुत जरूरी है।

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