Japanese Encephalitis Kya Hai – जानिए Japanese Encephalitis Ke Lakshan, Karan Aur Ilaz? | What is Japanese Encephalitis Causes, Symptoms, Prevention, and Best Treatments

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Dr. Puneet Boora
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Dr. Puneet Boora holds a Doctorate in Pharmacy (Pharm D) degree and have at least 1.5 years of writing experience in Health and Medicine related domains. He was a former writer for pharma magazines and articles. His hobbies including cricket, table tennis, and other sports. He is well known for his work in medicine dispensing and medical checkups. He prefers his work more and always tries to learn new therapeutic ways of medication dispensing. डॉ. पुनीत बोरा के पास फार्मेसी में डॉक्टरेट (फार्म डी) की डिग्री है और स्वास्थ्य और चिकित्सा से संबंधित डोमेन में कम से कम 1.5 वर्ष का लेखन अनुभव है। वह फार्मा पत्रिकाओं और आर्टिकल्स के पूर्व लेखक थे। क्रिकेट, टेबल टेनिस और अन्य खेल खेलना उनका शौक है। वह दवा वितरण और चिकित्सा जांच में अपने काम के लिए जाने जाते हैं। वह अपने काम को अधिक पसंद करते हैं और हमेशा दवा वितरण के नए चिकित्सीय तरीके सीखने की कोशिश करते हैं।

Japanese Encephalitis Kya Hai – जानिए Japanese Encephalitis Ke Lakshan, Karan Aur Upay? | What is Japanese Encephalitis in Hindi Symptoms Causes and Treatments

वैसे तो आज के समय में  बहुत से वायरस ऐसे भी हैं, जो कि दूसरे देशों से भारत में खेलते हैं परंतु यह वायरस इतने ज्यादा खतरनाक होते हैं कि प्रभावित व्यक्ति की बहुत ही बुरी हालत कर देते हैं उन्हीं वायरस में से एक है, जापानी एन्सेफेलिटिस यह एक बहुत ही खतरनाक वायरस है जो कि भारत में पहली बार 1955 में देखा गया था भारत के विभिन्न हिस्सों में इस वायरस का बहुत ही प्रकोप है, जैसे कि आसाम कर्नाटक उत्तर प्रदेश तथा बिहार आदि राज्यों पर इस वायरस का काफी प्रभाव पड़ा है, आज हम आपको इसी वायरस के बारे में विस्तार से बताएंगे कि :-

  • Japanese Encephalitis क्या है – What Is Japanese Encephalitis In Hindi?
  • Japanese Encephalitis के चरण – Stages Of Japanese Encephalitis?
  • Japanese Encephalitis Ke Karan – Causes Of  Japanese Encephalitis In Hindi?
  • Japanese Encephalitis Ke Lakshan – Symptoms Of Japanese Encephalitis In Hindi?
  • Japanese Encephalitis Se Bachne Ke Upay – Prevention Tips Of Japanese Encephalitis In Hindi?
  • Japanese Encephalitis का परीक्षण – Diagnosis Of Japanese Encephalitis In Hindi?
  • Japanese Encephalitis Ka ilaj – Treatment Of Japanese Encephalitis In Hindi?
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Japanese Encephalitis क्या है – What Is Japanese Encephalitis In Hindi?

जापानी एन्सेफेलिटिस एक तरह का वायरल संक्रमण है, जोकि हमारे मस्तिष्क तथा रीड की हड्डी को प्रभावित करता है, और यह बीमारी फ्लेवीवायरस ( Flavivirus )  से संक्रमित मच्छर के काटने के द्वारा फैलती है।

इस बीमारी के कारण आपको बहुत सी परेशानियां हो सकती हैं, जैसे तेज बुखार सिर दर्द तथा कुछ मामलों में तो इस बीमारी के द्वारा आप की मौत भी हो सकती है इसीलिए इस बीमारी का हमें सही समय पर इलाज करवाना बहुत जरूरी है, और इस वायरस का संक्रमण सबसे अधिक छोटे बच्चों को ही प्रभावित करता है और यह जातर गर्मी के मौसम में ही फैलता है, जाकर गर्मियों के मौसम में जब छोटे बच्चे अपने घर से बाहर खेलते हैं, तो उस समय यह मच्छरों के द्वारा उन बच्चों को हो जाता है।

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Japanese Encephalitis के चरण – Stages Of Japanese Encephalitis In Hindi?

इस बीमारी के मुख्य रूप से 3 चरण होते हैं जो कि इस प्रकार हैं :-

प्रोड्रोमल चरण ( Prodromal Stage )

यह इस बीमारी का परिसंचरण होता है और यह चरण हमारे मस्तिष्क तथा रीड की हड्डी के प्रभावित होने से पहले ही शुरू हो जाता है और दो-तीन दिनों तक इसका असर रहता है, इस दौरान 90% लोगों को तो बहुत ज्यादा बेचैनी तथा सिर दर्द होता है इसके साथ साथ ठंड भी लग सकती है और ज्यादातर देखा गया है, कि यदि आप 4 से 5 दिनों तक इससे बीमारी की दवाई नहीं लेते तो यह और भी बढ़ता जाता है और मरीज को बहुत परेशान करता है।

तीव्र एन्सेफेलिटिक चरण ( Acute Encephalitic Stage )

इस बीमारी के इस चरण में हमारे मस्तिष्क तथा रीड की हड्डी पर बहुत ही ज्यादा प्रभाव पड़ता है, और वह प्रभाव अगले 3 से 4 दिनों तक रहता है और इस चरण में सबसे पहले आपको हल्का बुखार होता है और वह बढ़ता जाता है, और इस बीमारी का प्रभाव आपके ऊपर इतना ज्यादा बढ़ने लगता है कि आप की तो उसने तथा समझने की क्षमता भी कम होने लगती है, और मांसपेशियों में दर्द रहना शुरू हो जाता है तथा आपकी गर्दन में भी आपको काफी कठोर पर महसूस होने लगता है।

इसके साथ साथ आपके शरीर का वजन भी घटने लगता है, और आपको भूख भी लगनी बंद हो जाती है और यदि समय पर इस बीमारी का उपचार ना किया जाए, तो रोगी कोमा में भी पहुंच सकता है। क्योंकि इस बीमारी में कभी-कभी मरीज के व्यवहार में अचानक से ही बहुत से बदलाव आने लगते हैं। जैसे कि उसको कुछ भी याद नहीं रहता या फिर बेहोश होना आदि तथा इसके साथ-साथ इस चरण में रोगी को बोलने में भी काफी परेशानी होती है, और सांस लेने में भी बहुत तकलीफ हो सकती है तथा उल्टी भी आ सकती है।

रिकवरी चरण ( Revovery Stage )

यह इस बीमारी का रिकवरी चरण होता है मतलब की इस चरण में मरीज धीरे धीरे स्वस्थ होना शुरू हो जाता है, और यह चरण तभी शुरू होता है जब आपके शरीर की सूजन घटने लगती है, और इस बीमारी के लक्षण भी कम दिखाई देने लगते हैं तथा उन लक्षणों में सुधार भी होने लगता है, इस प्रकार की स्थिति को रिकवरी चरण कहते हैं।

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Japanese Encephalitis Ke Lakshan – Symptoms Of Japanese Encephalitis In Hindi?

इस बीमारी के लक्षण आपको अपने शरीर में दिखाई दे सकते हैं, इस प्रकार के लक्षणों के दिखाई देने पर आपको तुरंत ही डॉक्टर की सलाह ले लेनी चाहिए, क्योंकि यदि इस बीमारी को शुरुआत में ही नियंत्रित कर लिया जाए, तो ही आपके लिए ठीक रहता है अन्यथा बाद में यह रोगी की मृत्यु का कारण भी बन सकती है, तो चलिए जानते हैं Japanese Encephalitis Ke Lakshan

  • इस बीमारी के लक्षणों के रूप में आपको बहुत ज्यादा बुखार भी हो सकता है, यदि आपको बहुत ज्यादा बुखार है और आप दवाई लेते हैं, तो आपको थोड़ा बहुत आराम मिलता है परंतु उसके पश्चात यदि आप को बुखार सिर से हो जाता है, तो आपको अपने शरीर की जांच करा लेनी चाहिए।
  • यदि किसी व्यक्ति को दौरे पड़ रहे हैं तो दौरे पड़ना भी इसी बीमारी का लक्षण हो सकता है, और तोरे पढ़ने के साथ-साथ यदि किसी व्यक्ति की गर्दन बहुत ज्यादा अकड़ जाती है, जिसके कारण वह इधर-उधर भी नहीं देख पा रहा तो यह भी इसी बीमारी का लक्षण होता है।
  • यदि आपको उच्च तापमान का बुखार होने के साथ-साथ कुछ ऐसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, जैसे कि आप यदि हर चीज बार-बार बोलते हैं या फिर आप ज्यादातर भ्रमित रहते हैं तो यह भी इसी बीमारी का लक्षण हो सकता है, क्योंकि इस बीमारी में भी लोग ज्यादातर थोड़े समय पहले की गई बात भी भूल जाते हैं और किसी दूसरे व्यक्ति से ठीक तरह से बात भी नहीं कर पाते।
  • यदि आपको इन लक्षणों के साथ-साथ अपने शरीर के अंगों में बेकाबू झटके महसूस हो रहे हैं, या फिर आपके शरीर की मांसपेशियों में काफी ज्यादा दर्द है तो यह भी इस बीमारी के लक्षण हो सकते हैं।
  • इस बीमारी का सीधा असर हमारे मस्तिष्क पर होता है। यदि आपको सिर दर्द हो रहा है या फिर सोचने समझने की क्षमता भी आपने नहीं रही या फिर यदि आपके साथ ऐसा हो रहा है, कि आप किसी भी चीज के बारे में जानते तो है परंतु फिर भी आप उसके बारे में नहीं बता पा रहे, तो यह भी इसी बीमारी के लक्षण हैं, क्योंकि इस बीमारी के कारण हमारे मस्तिष्क को होती नुकसान पहुंचता है जिसके कारण हमारा मस्तिष्क अपनी शक्ति धीरे धीरे खोने लगता है।

Japanese Encephalitis Ke Karan – Causes Of  Japanese Encephalitis In Hindi?

अब हम आपको Japanese Encephalitis Ke Karan बताने जा रहे हैं, जिनकी सहायता से आपको आसानी से पता चल जाएगा, कि यह बीमारी आपको किस प्रकार हो सकती है तो आप इस बीमारी से बचे रह सकते हैं :-

  • Japanese Encephalitis एक फ्लेविवाइरस के कारण होता है, जो कि मनुष्य तथा पशु हो इन दोनों को ही प्रभावित करता है, और यह वायरस इस वायरस से संक्रमित मच्छर के काटने के द्वारा पशु तथा मनुष्य में फैलता है, आपने अक्सर देखा होगा कि ज्यादातर जानवरों को बीमारी से बचाने के लिए इंजेक्शन लगाए जाते हैं, परंतु जिन जानवरों को इंजेक्शन नहीं लगवाए जाते तो उन जानवरों को मच्छर काटने के पश्चात यह बीमारी हो सकती है, परंतु मच्छर इस बीमारी से संक्रमित होगा तभी जानवरों को यह बीमारी हो पाएगी।
  • ज्यादातर सूअर तथा पक्षी इस वायरस के मुख्य वाहक होते हैं, यदि एक मच्छर इस प्रकार के जानवरों को काटने के पश्चात इंसान को काट लेता है, तो आपको आसानी से यह संक्रमण हो सकता है।
  • आमतौर पर ज्यादातर मच्छर ग्रामीण क्षेत्रों तथा गंदे इलाकों में रहते हैं और रात के समय यह काटते हैं, और जहां पर पानी ज्यादा लंबे समय तक खड़ा रहता है वहां पर अक्सर ज्यादा मच्छर पनपते हैं, जैसे कि चावल के खेतों में मच्छर अधिक पनपते हैं।

Japanese Encephalitis Se Bachne Ke Upay – Prevention Tips Of Japanese Encephalitis In Hindi?

इस बीमारी से बचने के बहुत से तरीके हैं अब वह आपको Japanese Encephalitis Se Bachne Ke Upay बताएंगे और आप इन्हें अच्छे से पढ़िएगा, ताकि आप इस बीमारी से बच सकें :-

  • सबसे पहले तो आपको मच्छर काटने से बचना चाहिए। यदि आपके घर के आसपास गंदा पानी भरा हुआ है या फिर कोई गड्ढे में पानी भरा हुआ है, जिसके कारण वहां पर बहुत सारे मच्छर जमा होते हैं, तो आपको समय-समय पर वहां पर साफ सफाई करनी चाहिए और कीटनाशक दवाइयां छिड़कने चाहिए। इसके साथ-साथ आपको अपने घरों के आसपास खुले मैदान में पेड़ पौधों पर भी कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए, तथा अपने घरों के आसपास नालियों में भी कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करना चाहिए जिसके कारण वहां पर मच्छर ही पैदा ना हो पाए।
  • इसके साथ-साथ यदि आप सुबह तथा शाम के समय कहीं बाहर जाते हैं, तो आपको पूरे कपड़े पहनने चाहिए मतलब कि आप की बाजू तथा टांगे ढ़की होनी चाहिए, जिसके कारण आपको मच्छर ना काट पाए।
  • ज्यादातर ऐसी जगहों पर जाने से आपको बचना चाहिए, जहां पर मच्छर ज्यादा होते हैं।
  • यदि आपको इस बीमारी के कोई भी लक्षण अपने शरीर में देखें, तो आपको तुरंत ही डॉक्टर के पास जाना चाहिए और अपना अच्छा इलाज कराना चाहिए।
  • आपको गंदे जानवरों के संपर्क में आने से भी बचना चाहिए, जैसे कि सूअर आदि क्योंकि इस प्रकार के जानवर इस बीमारी को अधिक बढ़ावा देते हैं।

Japanese Encephalitis का परीक्षण – Diagnosis Of Japanese Encephalitis In Hindi?

  • यदि आपने इस बीमारी का कोई भी लक्षण दिखता है, तो आप जब डॉक्टर के पास जाते हैं तो सबसे पहले डॉक्टर आपसे यही पूछता है, कि आप किस स्थान पर रहते हैं और आपके आसपास किस तरह का वातावरण है।
  • तो फिर उसके पश्चात ही डॉक्टर आपके मस्तिष्क का m.r.i. करता है, क्योंकि इस बीमारी के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव आपके मस्तिष्क पर ही पड़ता है, इसीलिए इस बीमारी के होने पर भी आपके मस्तिष्क की जांच की जाती है।
  • इसके अतिरिक्त आप की रीड की हड्डी से तरफ की जांच करने के लिए तथा द्रव निकालने के लिए रीड की हड्डी के निचले हिस्से पर सुई चुभने का प्रशिक्षण भी किया जाता है, जिसको Lumbar Puncture या फिर Spinal Tap भी कहा जाता है।
  • इस बीमारी का पता लगाने के लिए आपका Immunofluorescence Test भी हो सकता है, क्योंकि इस टेस्ट के द्वारा मानव एंटीबॉडी का भी पता लगाया जा सकता है।
Japanese Encephalitis Ka ilaj

Japanese Encephalitis Ka ilaj – Treatment Of Japanese Encephalitis In Hindi?

  • वैसे तो इस बीमारी का कोई भी इलाज नहीं है, यह बीमारी यदि किसी भी व्यक्ति को हो जाती है, तो केवल इस बीमारी के लक्षणों में ही दवाइयों के सहारे उपचार किया जा सकता है, इस प्रकार की बीमारी में डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक दवाइयां देता है जो कि वायरस के असर को खत्म करती है, परंतु इस बीमारी का इलाज यहां तक संभव है कि यदि आप दवाइयां खाते हैं, तो यह बीमारी वहीं पर रुक जाएगी और फिर इसके लक्षण धीरे-धीरे कम होने शुरू हो जाएंगे इस बीमारी का इलाज तुरंत ही नहीं हो जाता इस बीमारी का इलाज होते होते कुछ हफ्तों का समय लगता है।
  • यदि आप इस बीमारी के वायरस से संक्रमित हैं, तो आपको अपनी जीवनशैली भी थोड़ी बदलनी चाहिए मतलब कि आप को पोषक आहार का सेवन करना चाहिए, जैसे कि हरी सब्जियों तथा दालों का सेवन आपको करना चाहिए। जो कि आपके शरीर में सभी पोषक तत्व को पूरा करते हैं और इसके साथ साथ ही आपको किसी नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि नशीले पदार्थों का सेवन करने से भी इस बीमारी के दौरान हमारे मस्तिष्क को काफी क्षति पहुंच सकती हैं।

Japanese Encephalitis Conclusion

आशा करते हैं कि आपको हमारी यह पोस्ट बहुत ही पसंद आई होगी। इस पोस्ट के माध्यम से हमने आपको Japanese Encephalitis के बारे में विस्तार से बताया है, कि Japanese Encephalitis Kyu Hota Hai और Japanese Encephalitis Ke Lakshan तथा इसके साथ-साथ हमने आपको Japanese Encephalitis Se Bachne Ke Upay और Japanese Encephalitis  Ka ilaj भी बताया है, यदि अब भी आपको Japanese Encephalitis के बारे में कोई भी प्रश्न ऐसे पूछना हो तो आप कमेंट सेक्शन के माध्यम से हम से पूछ सकते हैं, हम आपको समय मिलते ही उसका उत्तर जरूर देंगे। धन्यवाद

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