Poliomyelitis Or Polio in Hindi: छोटे बच्चों को पोलिया क्यों होता हैं – जानिए पोलियो के लक्षण व उपचार ?|Why do young children get polio – know the symptoms and treatment of polio?

Must Read

Dr. Nick Kumar Jaiswal
Dr. Nick Kumar Jaiswalhttp://goodswasthya.com
He is a professional blog writer for more than 2 years, he holds a degree in Doctorate in Pharmacy(Pharm D) with experience in medicine dispensing and medication ADRs. His interest in medicine makes him excellent in his research project. Now he prefers to write blogs about medications and diseases. His hobbies include football and watching Netflix. He loves reading novels and gain knowledge about more medication ADRs. He is very helpful in nature and you will often find him helping others in the treatment. डॉ जयसवाल 2 से अधिक वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉग लेखक है, ये दवा वितरण और दवा एडीआर में अनुभव के साथ एक फार्म डी डिग्री होल्डर है। चिकित्सा में उनकी रुचि उन्हें अपनी शोध परियोजना में उत्कृष्ट बनाती है। अब वह दवाओं और बीमारियों के बारे में ब्लॉग लिखना पसंद करते हैं। उनके शौक में फुटबॉल और नेटफ्लिक्सिंग, उपन्यास पढ़ना और अधिक दवा एडीआर के बारे में ज्ञान प्राप्त करना शामिल है। वह प्रकृति में बहुत मददगार है और अक्सर आप इन्हे दूसरों की इलाज में मदद करते हुए देख पाएंगे ।
Poliomyelitis Or Polio in Hindi Table Of Content:-

Poliomyelitis Or Polio in Hindi: छोटे बच्चों को पोलिया क्यों होता हैं – जानिए पोलियो के लक्षण व उपचार ?

  • बहुत सी बीमारियां बच्चों को जन्म के साथ हो सकती हैं जिनके कारण बच्चा जिंदगी भर परेशान रह सकता हैं, क्योंकि बहुत सी बीमारियां ऐसी होती हैं जो बच्चों को माता के गर्भ में ही लग जाती हैं और यह बीमारियां बच्चे को उम्र भर रहती हैं आपने अक्सर पोलियो के बारे में तो सुना ही होगा। पोलियो की बीमारी से बच्चों को बचाने के लिए बचपन में ही उन्हें टीके लगाए जाते हैं या फिर उन्हें ड्रॉप्स भी पिलाई जाती हैं ताकि उन्हें बचपन से ही पोलियो की बीमारी से सुरक्षित रखा जा सकें। आज के समय में तो पोलियो की बीमारी का प्रकोप भारत में काफी ज्यादा कम होने लगा हैं, लेकिन बहुत से ऐसे क्षेत्र आज भी हैं जहां पर पोलियो की बीमारी से बच्चे ग्रसित होते हैं। पोलियो की बीमारी एक काफी खतरनाक बीमारी में से एक है जो कि बच्चे के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता हैं।
  • ज्यादातर तो कम उम्र के बच्चों में ही पोलियो के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं और हम आपको बता दें की पोलियो की बीमारी की वजह से व्यक्ति को पैरालिसिस भी हो सकता है लेकिन अब हर एक बीमारी का इलाज संभव है, इसीलिए पोलियो को भी शुरुआती लक्षणों में ही आसानी से नियंत्रित किया जा सकता हैं। आज हम इस पोस्ट के माध्यम से आप को पोलियो की बीमारी के बारे में ही विस्तार से सभी जानकारियां देंगे की Bacho Me Polio Ke Karan In Hindi तथा Polio Ke Lakshan In Hindi इसी के साथ-साथ हम आपको Polio Ka ilaz In Hindi तथा Bacho Ko Polio Se Kaise Bachaye In Hindi के बारे में भी बताएंगे ताकि आप अपने बच्चे को पोलियो की बीमारी से आसानी से बचा सकें।
Poliomyelitis

पोलियो क्या है – What Is Poliomyelitis In Hindi ?

यह एक ऐसी बीमारी होती है जो आमतौर पर 5 वर्ष की आयु से कम आयु के बच्चों को प्रभावित करती हैं। पीलिया एक संक्रामक रोग है जो कि एक विशेष रूप के वायरस के कारण बच्चों में फैलता हैं। जब कोई भी बच्चा पोलियो के वायरस से संक्रमित होता हैं, तो पोलियो का वायरस उस बच्चे की तंत्रिका तंत्र ( nervous system )   पर हमला कर देता है और इसी वजह से पोलियो की बीमारी से ग्रसित हो जाने के पश्चात बच्चों को paralysis भी हो सकता हैं। आपने अपने आसपास भी बहुत से ऐसे लोग देखे होंगे जो कि बचपन में पोलियो होने के कारण जीवन भर ढंग से चल फिर नहीं पातें। आज के समय में तो बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए जन्म के समय ही पोलियो के टीके लगाए जाते हैं जिससे आपके बच्चे पोलियो की बीमारी से आसानी से बच जाते हैं मगर फिर भी पोलियो की बीमारी से दुनिया में काफी देश प्रभावित हैं, लेकिन कुछ देश ऐसे हैं जिन्हें World Health Organization के द्वारा भी पोलियो मुक्त देश बताया जा चुका है उनमें अमेरिका, यूरोप, दक्षिण पूर्व एशिया तथा पश्चिमी प्रशांत शामिल हैं।

पोलियो के कितने प्रकार होते हैं – Types Of Poliomyelitis Disease In Hindi ?

पोलियो के अलग-अलग तीन प्रकार होते हैं जैसे कि :-

1. Abortive Poliomyelitis

यह पोलियो का सबसे हल्का प्रकार होता है जब कोई व्यक्ति पोलियो के इस प्रकार से ग्रसित होता हैं, तो उसका तंत्रिका तंत्र प्रभावी तो होता हैं, लेकिन ज्यादा प्रभावित नहीं होता और इस पोलियो के संक्रमित होने पर बच्चे का शरीर आसानी से 72 घंटों के अंदर रिकवरी भी कर सकता है अगर आपके बच्चे के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अच्छी हैं, तो आपका बच्चा आसानी से 24 घंटे के अंदर भी इस प्रकार के गोलियों से रिकवरी कर सकता हैं।

2. नॉनपैरालिटिक पोलियोमाइलाइटिस ( Nonparalytic Poliomyelitis )

इस प्रकार का पोलियो वायरस दूसरे पोलियो से थोड़ा खतरनाक होता है और इसके लक्षण भी काफी असामान्य हो सकते हैं लेकिन इस प्रकार के गोलियों से लकवा होने का खतरा बिल्कुल भी नहीं होता। जब बच्चा इस पोलियो से संक्रमित होता है तो उसका मस्तिष्क भी प्रभावित होता हैं। मस्तिष्क के साथ-साथ उसके शरीर का तंत्रिका तंत्र भी प्रभावित होता है लेकिन इस प्रकार के पीलिया के लक्षण बच्चों में ज्यादा से ज्यादा 10 दिनों तक रहते हैं। यदि बच्चे का इलाज तुरंत ही शुरू कर दिया जाए तो 8 से 10 दिन के अंदर इस प्रकार के पीलिया से छुटकारा पाया जा सकता है और इलाज न करवाने की स्थिति में यह गंभीर भी हो सकता हैं।

3. पैरालिटिक पोलियोमाइलाइटिस ( Paralytic Poliomyelitis )

 यह पोलियो की बीमारी का सबसे गंभीर रूप होता है और इस प्रकार के पोलियो वायरस ( polio virus ) से ग्रसित होने पर बच्चे को आसानी से paralysis भी हो सकता हैं। क्योंकि इस प्रकार का पोलियो बच्चे की आंख से मस्तिष्क तथा धीरे-धीरे रीड की हड्डी तक फैल जाता है और यह वायरस मस्तिष्क की गति को नियंत्रित करने वाली सभी नसों को स्थाई रूप से नुकसान पहुंचा देता है जिसकी वजह से बच्चे को पैरालिसिस ( paralysis ) हो सकता हैं, इसीलिए पोलियो के इस प्रकार में बच्चे का इलाज जल्द से जल्द करवाना जरूरी होता हैं।

बच्चों में पोलियों के क्या लक्षण होते हैं – Symptoms Of Poliomyelitis Disease In Hindi ?

बच्चों में पोलियो की बीमारी के काफी अधिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं जिनसे आप आसानी से ही पोलियो की  बीमारी का पता लगा सकते हैं जैसे कि :-

  • अगर कोई बच्चा पोलियो का शिकार हो जाता हैं, तो पूरी होने पर उस बच्चे को काफी ज्यादा उल्टी आती है और उसका सिर भी दर्द होता है ऐसी स्थिति में आपका बच्चा काफी ज्यादा रोता भी हैं।
  • जब आपके बच्चे को पोलियो हो जाता हैं, तो पोलियो होने पर आपके बच्चे के पूरे शरीर में काफी ज्यादा अकड़न रहती है जिसकी वजह से उसकी गर्दन भी पूरी तरह अकड़ जाती हैं।
  • पोलियो होने पर आपके बच्चे की पीठ में काफी ज्यादा दर्द रहता है उसकी पीठ में इतना ज्यादा दर्द होता है कि, वह बर्दाश्त भी नहीं होता इसीलिए पीठ दर्द होने पर बच्चे को ज्यादा बर्दाश्त ना करने दें।
  • जब आपके बच्चे को पोलियो हो जाता हैं, तो पोलियो होने पर आपके बच्चे के हाथों पैरों में भी काफी ज्यादा दर्द रहता है जिसकी वजह से उसे चलने फिरने में भी काफी कठिनाई होती हैं। इसीलिए जब आपके बच्चों के हाथों पैरों में इस प्रकार दर्द रहे तो आपको तुरंत ही उसे इलाज की आवश्यकता हैं।
  • अगर आपका बच्चा पोलियो का शिकार हो जाता हैं, तो पोलियो होने पर आपके बच्चे के गले में बहुत ज्यादा खराश रहती है पुरुष की खराश इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि उसे बोलने में भी दर्द होने लगता हैं।
  • जब आपके बच्चे को पोलियो हो जाता हैं, तो पोलियो होने पर आपके बच्चे को काफी ज्यादा थकान रहती है और बच्चे की थकान धीरे-धीरे इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि वह बिल्कुल ही सुस्त सा हो जाता हैं। इसीलिए जब आपका बच्चा ज्यादा थका हुआ रहने लगे तो उसकी एक बार जांच करवा लेनी चाहिए।
  • आपके बच्चे को पोलियो होने पर आपका बच्चा दिन प्रतिदिन कमजोर होने लगता है और उसका वजन भी घटने लगता हैं, क्योंकि पोलियो से ग्रसित होने के कारण आपके बच्चे के शरीर पर खाने-पीने का असर भी नहीं पड़ता।
  • पोलियो होने पर कुछ बच्चों को लगातार बुखार भी रह सकता हैं, क्योंकि जब पोलियो गंभीर रूप से बच्चे को हो जाता है तो फिर बुखार होना आम बात हैं।
Poliomyelitis

बच्चों में पोलियों होने के कारण – Causes Of Poliomyelitis Disease In Hindi ?

बच्चों को पोलियो होने के अनेकों कारण हो सकते हैं। आपको उन कारणों के बारे में पता होना बहुत ही जरूरी है तभी आप अपने बच्चे को भविष्य में पोलियो होने से बचा सकते हैं जैसे कि :-

  • अगर आपके घर के आसपास काफी ज्यादा गंदगी है और उस गंदगी में काफी ज्यादा बदबू भी आती हैं, तो इस प्रकार की जगह पर पोलियो वायरस का संक्रमण अधिक फैलता हैं। ऐसे इलाकों के आसपास घर होने पर आपको साफ सफाई का बहुत ज्यादा ख्याल रखना पड़ता हैं।
  • अगर आप अपने घर में बिल्कुल भी साफ सफाई नहीं रखते और आपके घर में काफी ज्यादा धूल मिट्टी जमी रहती हैं तो इस कारण भी पोलियो की बीमारी फैलने का काफी खतरा होता हैं, क्योंकि इस प्रकार का वायरस हमेशा गंदगी में ही मौजूद रहता हैं।

Cradle Cap: नवजात शिशु के सिर पर पपड़ी क्यों जमती हैं – जानिए सिर पर पपड़ी जमने के कारण, बचाव व इलाज ?

  • अगर आपके घर के आसपास बहुत ज्यादा गंदगी हैं, अगर उस गंदगी की चपेट में आपके बच्चे के खिलौने आते हैं और उन खिलौनों को आप साफ नहीं करते ऐसे ही बच्चों को दे देते हैं तो इस प्रकार भी बच्चों को पोलियो हो सकता हैं।
  • अगर आपके घर के आसपास दूषित पानी इकट्ठा हो रहा है और आपका बच्चा उस दूषित पानी के संपर्क में किसी ना किसी वजह से आ रहा हैं, तो उसकी वजह से भी आपका बच्चा पोलियो से संक्रमित हो सकता हैं।
  • अगर आपके घर के आसपास कोई व्यक्ति पोलियो से संक्रमित है और वह आपके बच्चे के आसपास छिंकता है या फिर खांसता हैं, तो इसकी वजह से भी आपका बच्चा पोलियो के वायरस के संपर्क में आ सकता हैं। इसीलिए आपको अपने बच्चों को किसी इस प्रकार के व्यक्ति की चपेट में नहीं आने देना चाहिए।
  • अगर आपके घर के टॉयलेट में अक्सर आपके घर के सदस्य है या फिर बाहर का कोई व्यक्ति आता जाता है और टॉयलेट अच्छी तरह साफ नहीं किया गया हैं, तो इसकी वजह से भी आपका बच्चा पोलियो की बीमारी से संक्रमित हो सकता हैं, इसीलिए आपको अपने घर का टॉयलेट पूरी तरह से साफ रखना चाहिए। खासतौर पर यदि आपके घर में बच्चे हैं तो बच्चों वाले घरों में तो टॉयलेट साफ होना आवश्यक हैं।
  • अगर गर्भावस्था के समय कोई महिला पीलिया से संक्रमित हो जाती हैं, तो यह हो सकता है कि उसका बच्चा जब जन्म ले तो जन्म के साथ ही वह पीलिया की बीमारी से संक्रमित हो, इसीलिए बच्चे की माता को अपना इलाज करवाना आवश्यक हैं।
  • अगर आप अपने बच्चों को ताजे फल सब्जियां खिलाते हैं और उन ताजे फल सब्जियों को आप बिना धोए ही बच्चों को खिला देते हैं तो इस प्रकार भी बच्चा पोलियो के वायरस से संक्रमित हो सकता हैं, क्योंकि इस चीज का नहीं पता होता कि पोलियो का वायरस कहां पर हैं, इसीलिए इस प्रकार की चीजों से भी बच्चा संक्रमित हो सकता हैं।

पोलियो किस प्रकार बच्चे को प्रभावित करता है – How Does Poliomyelitis Affect the Children’s In Hindi ?

अगर आपका बच्चा पोलियो के वायरस से संक्रमित हो जाता हैं, तो आपके बच्चे के शरीर में सिर्फ 8 से 15 दिनों के अंदर-अंदर ही पोलियो के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं और यदि इन लक्षणों को देखकर बच्चे का इलाज ना करवाया जाए तो बच्चे को पैरालिसिस भी आसानी से हो सकता हैं।

पोलियो की बीमारी की जांच कैसे की जाती हैं – Diagnoses Of Poliomyelitis Disease In Hindi ?

  • अगर आपके बच्चे के शरीर में आपको पोलियो के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो आपको कुछ नहीं तो बच्चे को डॉक्टर की सलाह लेकर सामान्य दवाई ही खिलानी चाहिए, क्योंकि कई बार पोलियो के जैसे ही लक्षण बच्चों को शरीर में कमजोरी होने पर भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए पहले आपको बच्चे का सामान्य इलाज करना चाहिए। अगर सिर्फ 1 या 2 दिन में ही आपके बच्चे के शरीर में कोई फर्क नहीं दिखता तो फिर आपके बच्चे को जांच की आवश्यकता होती हैं।
Poliomyelitis
image source:- http://www.canva.com
  • पोलियो की बीमारी की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर बच्चे की शारीरिक जांच भी करते हैं जिससे कि बीमारी का पता लगाया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त पोलियो की बीमारी के बारे में पूर्ण रूप से जानने के लिए बच्चे के मुंह में से निकलने वाले थूक ( Sputum ) की जांच laboratory के द्वारा की जाती है,क्योंकि थूक के माध्यम से आसानी से पोलियो की बीमारी का पता लगाया जा सकता हैं।

पोलियो के कारण समय के साथ-साथ बच्चों के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है – How Does Poliomyelitis Affect Children’s Bodies Over Time In Hindi ?

अगर किसी व्यक्ति को पोलिया हो ही जाता हैं, तो उस व्यक्ति के शरीर में पोलियो के दीर्घकालिक ( Long Term ) प्रभाव बहुत से हैं जैसे कि :-

  • पोलियो के मरीजों को अक्सर नींद की समस्या रहती हैं, क्योंकि उन्हें रात के समय बहुत ही कम नींद आती हैं।
  • अगर कोई बच्चा पोलियो से प्रभावित होता हैं, तो उसके जोड़ों और मांसपेशियों में हमेशा ही दर्द रहता है और समय के साथ-साथ यह दर्द बढ़ता रहता हैं।
  • अगर कोई बच्चा बचपन में पोलियो की बीमारी से ग्रसित होता हैं, तो उस बच्चे को हमेशा ठंडे तापमान में काफी परेशानी होती हैं, क्योंकि वह ठंडे तापमान में रहने से पूरी तरह असमर्थ होता हैं।
  • अगर कोई बच्चा बचपन में पोलियो की बीमारी से ग्रसित हो जाता है, तो उस बच्चे को Paralysis भी हो सकता है और Paralysis होने के कारण उस बच्चे को हमेशा ही चलने फिरने में तकलीफ हो सकती हैं।

बच्चों को पोलियो की बीमारी से कैसे बचाएं – Prevention From Poliomyelitis Disease In Hindi ?

  • अगर आप अपने बच्चे को बचपन में ही पोलियो की बीमारी से बचाना चाहते हैं, तो आपको अपने बच्चे को जन्म के समय ही पोलियो की बीमारी से बचाने के लिए टीका लगवाना चाहिए। हम सभी इस बात को जानते हैं कि जब बच्चे का जन्म होता है तो बच्चे का टीकाकरण होता है और उसी टीकाकरण के दौरान बच्चे को सभी जरूरी टीके लगाए जाते हैं जो कि बच्चे को भविष्य में होने वाले अनेकों प्रकार के रोगों से बचाते हैं, इसीलिए बच्चों का टीकाकरण आवश्यक होता हैं।
  • बच्चों को टीकाकरण के दौरान पोलियो की बीमारी से बचाने के लिए भी टीके लगाए जाते हैं, अगर बच्चे को जन्म के समय ही पोलियो का टीका लग जाता है तो फिर भविष्य में कभी भी उसे पोलियो की बीमारी नहीं हो सकती। अगर टीका लगने के बाद भी बच्चे को पोलियो की बीमारी हो जाती हैं, तो बच्चे का शरीर आसानी से उस बीमारी में अपने शरीर की रिकवरी कर लेता है जिसकी वजह से उसके शरीर को नुकसान नहीं पहुंचता, इसीलिए बच्चे के जन्म के समय बच्चे को पोलियो का टीका जरूर लगवाएं।
  • पोलियो का टीका लगवाने के पश्चात भी बच्चे को 5 साल की उम्र से पहले पोलियो की ड्रॉप्स भी पिलाई जाती हैं, क्योंकि आपके नजदीकी सभी सरकारी अस्पतालों में पिलाई जाती हैं, इसीलिए बच्चे को 5 साल की उम्र से पहले पहले पोलियो की ड्राप भी जरूर पिलाएं।
  • अगर आप अपने बच्चे को पोलियो की बीमारी से बचपन में ही बचाना चाहते हैं, तो आपको अपने घर के आस-पास पूरी तरह से सफाई रखनी होगी। अगर आपके घर के आसपास काफी गंदगी रहती हैं, तो उस गंदगी में भी काफी बैक्टीरिया पनपते हैं जो बच्चे को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • आपको अपने बच्चों के खिलौनों को पूरी तरह से धोना चाहिए। आपका बच्चा जब भी अपने खिलौनों को इस्तेमाल करता हैं, तो खिलौनों को इस्तेमाल करने से पहले आपके बच्चे के खिलौने पूरी तरह से साफ सुथरे होने चाहिए। आप खिलौनों को अच्छी तरह साफ करने के लिए उन्हें एक पानी की बाल्टी में डाल कर Liquid Detol उसमें डाल सकते हैं इस प्रकार खिलौनों में मौजूद सभी हानिकारक बैक्टीरिया भी मर जाएंगें।
  • छोटे बच्चों का शरीर बहुत ही कमजोर होता हैं, जो कि बीमारियों से किसी भी प्रकार नहीं लड़ सकता। इसीलिए आपको अपने घर के शौचालय की भी पूरी तरह से सफाई करनी चाहिए। अगर आपके घर पर उपस्थित हुए शौचालय साथ नहीं होगा तो उस के माध्यम से भी बच्चा पोलियो से संक्रमित हो सकता हैं।
  • अगर आप घर से बाहर जाते हैं तो आप जब भी घर पर आते हैं, तो आपको पहले अपने हाथ पर अच्छी तरह से धोने चाहिए और कपड़े भी बदलने चाहिए तथा उसके पश्चात ही आपको अपने बच्चों के पास जाना चाहिए, क्योंकि आपका शरीर तो हानिकारक वायरस से ग्रसित हुए बिना भी बच सकता हैं, लेकिन आपका बच्चा तुरंत ही उस वायरस की चपेट में आ सकता हैं।

पोलियो का क्या इलाज हैं – Treatment Of Poliomyelitis Disease In Hindi ?

अगर आपके बच्चे को पोलियो की बीमारी हो जाती है और आप इस पोलियो की बीमारी को शुरुआत में ही पकड़ लेते हैं, तो फिर इस बीमारी का इलाज शुरुआत में ही कर दिया जाता है लेकिन हम तो आपको यही कहेंगे कि अगर आप अपने बच्चे को पोलियो की बीमारी से बचाना चाहते हैं, तो आपको बच्चे के जन्म के समय बच्चे का टीकाकरण करवाना होगा। क्योंकि टीकाकरण के दौरान बच्चे को पोलियो की बीमारी से बचाने का टीका भी लगाया जाता है जिसके माध्यम से बच्चों को भविष्य में कभी भी पोलियो की बीमारी होने का खतरा नहीं रहता।

Conclusion –

आप अपने बच्चे को किस प्रकार पोलियो की बीमारी से बचा सकते हैं और पोलियो की बीमारी से बचने के लिए किन-किन बातों का ख्याल रखना पड़ता हैं। इसके बारे में भी हमने आपको विस्तार से बताया है अगर आप अपने बच्चे को पोलियो की बीमारी से बचाना चाहते हैं, तो आपको उसके जन्म के समय ही उसे पोलियो की बीमारी से बचाने के लिए टीका लगवाना होगा तभी वह पोलियो की बीमारी से बच सकता हैं। इसके अतिरिक्त हमने आपकी सहायता के लिए Bacho Me Polio Ke Karan In Hindi तथा Polio Ke Lakshan In Hindi के बारे में आपको बता दिया हैं। इसी के साथ-साथ हमने आपको Polio Ka ilaz In Hindi तथा Bacho Ko Polio Se Kaise Bachaye In Hindi के बारे में भी बताया है ताकि आप अपने बच्चे को पोलियो की बीमारी से आसानी से बचा सकें, अगर अभी भी आपको हमसे How To Prevant Our Children From Poliomyelitis Disease In Hindi से संबंधित कोई भी प्रश्न पूछना हो तो कमेंट सेक्शन में कमेंट करें। धन्यवाद

लेटेस्ट लेख

Low Ejection Fraction: लो इजेक्शन फ्रैक्शन क्या है? जानिए लो इजेक्शन फ्रैक्शन के लक्षण एवं बचाव

Low Ejection Fraction: लो इजेक्शन फ्रैक्शन क्या है? जानिए लो इजेक्शन फ्रैक्शन के लक्षण एवं बचाव

More Articles Like This