Baby Care During Weather Change: बदलते मौसम में माता-पिता अपने छोटे बच्चों का ख्याल कैसे रखें |How parents take care of their young children in the changing seasons

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Dr. Arti Sharma
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Dr. Arti Sharma is a certified BAMS doctor with at least 2 years of article writing experience on various medication and therapeutic lines. She is known for her best work in ayurvedic medication knowledge and there uses. Her hobbies including reading books and writing articles. With a good grip in sports, she uses to play for her university cricket team as a captain. Her work for ayurvedic is well known.डॉ आरती शर्मा एक प्रमाणित BAMS डॉक्टर है जिन्हे कम से कम 2 साल का विभिन्न दवाइयों और चिकित्सीय रेखाओं पर लेखन का अनुभव है। वह आयुर्वेदिक दवाओं के ज्ञान और उनके उपयोग में अपने बेहतरीन काम के लिए जानी जाती हैं। उनका शौक किताबें पढ़ना और लिखना है। खेलों में अच्छी पकड़ के साथ, वह एक कप्तान के रूप में अपनी विश्वविद्यालय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुकी हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में उनका काम अच्छी तरह से जाना जाता है।
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Baby Care During Weather Change: बदलते मौसम में माता-पिता अपने छोटे बच्चों का ख्याल कैसे रखें

छोटे बच्चों का शरीर काफी ज्यादा कमजोर होता हैं। इसीलिए बदलते मौसम में छोटे बच्चों को कोई ना कोई बीमारी अपना शिकार बना ही लेती है जब भी मौसम बदलता हैं, तो मौसम के बदलते ही बच्चों को खांसी जुखाम ठंड लगना यह बुखार जैसी समस्याएं हो जाती हैं। हमारे देश में तीन तरह का मौसम होता है जैसे कि सर्दी गर्मी और बरसात का मौसम जब कोई एक मौसम चल रहा होता है और वह मौसम धीरे-धीरे बदल कर दूसरे मौसम की शुरुआत हो रही होती हैं, तो उस समय हमारे वातावरण में भी बहुत से परिवर्तन होते हैं और बहुत से नए जीवाणु भी जन्म लेते हैं जो कि बच्चों को हानि पहुंचा सकते हैं।

इसीलिए बदलते मौसम में बच्चों के माता-पिता को ही उनका ख्याल रखना पड़ता है क्योंकि बच्चों को इतनी ज्यादा समझ नहीं होती कि वह अपना ख्याल खुद ही रख सकें। आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको किसी चीज के बारे में विस्तार से बताएंगे कि Badalte Mosam Me Bacho Ka Khayal Kaise Rakhe तथा Winter Baby Care Tips In Hindi इसके अतिरिक्त हम आपको Summer Baby Care Tips In Hindi तथा Monsoon Baby Care Tips In Hindi के बारे में भी पूरी तरह से जानकारी देंगे ताकि आप हर एक मौसम में अपने बच्चे को स्वस्थ रख सकें।

मौसम में बदलाव होने पर बच्चों को किस प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं – What Types of Diseases Can Children Get When the Weather Changes In Hindi ?

अगर मौसम में बदलाव होता है तो बदलते मौसम में बच्चों की सुरक्षा करना माता-पिता की जिम्मेदारी होती है क्योंकि बदलते मौसम में बच्चों को आसानी से छोटी मोटी बीमारीयां लग जाती है जोकि धीरे-धीरे एक गंभीर रूप भी ले सकती हैं लेकिन हमारे देश में मौसम भी तीन तरह का होता है जैसे कि बरसात का मौसम, सर्दी का मौसम और गर्मी का मौसम, जब भी इन तीनों में से किसी भी मौसम की शुरुआत होती है तो मौसम की शुरुआत के साथ हमारे आसपास के वातावरण में अनेकों बीमारियां भी जन्म ले लेती है जिनके संपर्क में बच्चे आ जाते हैं इसलिए अब हम आपको एक एक करके इन तीनों मौसम की बीमारियों के बारे में विस्तार से बताते हैं

Baby Care During Weather Change

1. सर्दी के मौसम की शुरुआत

जब सर्दी के मौसम की शुरुआत होती हैं, तो सर्दी के मौसम के साथ ही बच्चों को अनेकों बीमारियां होने का खतरा हो जाता है जैसे कि

  • जुखाम होना
  • ठंड लगना
  • सर्दी लगना
  • गंभीर रूप से खांसी होना
  • दस्त लगना
  • निमोनिया हो जाना
  • बुखार होना

2. गर्मियों के मौसम में

अगर गर्मियों के मौसम की शुरुआत हुई है तो गर्मियों के मौसम की शुरुआत में भी बच्चों को अनेकों प्रकार की बीमारियां अपना शिकार बना सकती हैं जैसे कि –

त्वचा संबंधित बीमारियां

जब गर्मियों के मौसम की शुरुआत होती है तो वातावरण में से नमी कम होने लगती है जिसकी वजह से बच्चों की त्वचा में भी नमी कम होने लगती है और अगर बच्चों की त्वचा में से नमी कम होने लगेगी तो उसके कारण उनकी त्वचा रूखी रूखी सी रहने लगती हैं और त्वचा पर थोड़ी सी ही खरोच लगने पर एकदम से खून निकल जाता है क्योंकि त्वचा के अंदर की नमी पूरी तरह से खत्म हो चुकी होती है। अब ऐसे में अगर रोजाना बच्चों की त्वचा की मालिश है ना की जाए तो उनकी त्वचा खराब होने लगती हैं। इसलिए बच्चों की माता को उनकी रोजाना मालिश करनी चाहिए।

होंठ फटना

गर्मियों के मौसम की शुरुआत में बच्चों के होंठ फटने लगते हैं क्योंकि हमारे होठों की त्वचा भी काफी संवेदनशील होती है और जरा सी ही नमी की कमी होने पर त्वचा फटने लगती हैं। इसीलिए अगर आपको अपने बच्चों के होठों पर पपड़ी जब भी हुई दिखाई दे तो तुरंत ही उनके फोटो पर थोड़ा सा देसी घी लगा सकते हैं, क्योंकि देसी घी त्वचा के अंदर नमी बनाए रखने में काफी फायदेमंद रहता हैं।

सिर पर पपड़ी जमना

जब सर्दियों का मौसम होता है तो उस समय आप अपने बच्चों को ज्यादा से ज्यादा समय तक का सिर पर टोपी पहना कर रखते हैं, ताकि उसे ठंड ना लग जाए। मगर जब सर्दियों का मौसम खत्म होने पर गर्मियों के मौसम की शुरुआत होने लगती है। उस समय जब आप बच्चे को टोपी पहनाना बंद करेंगे तो आप यह देखेंगे कि आपके बच्चे के सिर में सफेद सफेद पपड़ी भी जमने लगी है। यह चिंता वाली बात नहीं है लेकिन यह सफेद पपड़ी डैंड्रफ की प्रजाति की ही होती हैं। जब बच्चे का सिर ज्यादा से ज्यादा समय तक टोपी से ढका रहता है तो उसके कारण बच्चे के बालों के नीचे की त्वचा पर पपड़ी जम जाती हैं। इसलिए जब गर्मियों के मौसम की शुरुआत होती है तो आपको दो-तीन बार अपने बच्चे का सिर गर्म पानी से शैंपू की सहायता से धोना चाहिए।

जुखाम होना

बदलते मौसम में जुखाम होना तो तय है चाहे वह गर्मी का मौसम हो या फिर सर्दी का इसीलिए बदलते मौसम में आपको अपने बच्चों को लेकर डील नहीं बरतनी चाहिए। अगर मौसम थोड़ा बदल भी रहा है और गर्मी के मौसम की शुरुआत हो रही है तो भी आपको अपने बच्चों को थोड़े मोटे कपड़े ही पहना कर रखनी चाहिए।

पानी की कमी

जब मौसम ठंडा होता है तो उस समय बच्चों के शरीर को पानी की आवश्यकता तो होती है लेकिन  बच्चा अगर थोड़ा पानी भी पीता है तो भी वह उसके लिए काफी होता है। मगर जब गर्मी के मौसम की शुरुआत होती है तो उस समय बच्चों के माता-पिता को उन्हें  पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना चाहिए, मतलब की  2 से 5 साल के बच्चे को  रोजाना 3 से 7 गिलास पानी तो जरूर पीना ही चाहिए, क्योंकि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए पानी बहुत ही ज्यादा आवश्यक होता है। बच्चों में पानी की कमी के कारण अनेकों प्रकार की बीमारियां भी जन्म ले सकती हैं इसीलिए बच्चों के शरीर में बदलते मौसम में पानी की कमी बिल्कुल भी ना होने दें।

एलर्जी होना

जब गर्मियों के मौसम की शुरुआत होती है तो गर्मियों के मौसम की शुरुआत के साथ-साथ अनेकों प्रकार के खतरनाक बैक्टीरिया भी जन्म ले लेते हैं। इसीलिए गर्मियों के मौसम में बच्चे को एलर्जी होने का खतरा भी बना रहता है गर्मियों के मौसम में बच्चों को त्वचा संबंधित एलर्जी हो सकती हैं या फिर हाथों पैरों पर फोड़े-फुंसियां निकल सकते हैं। इस प्रकार के लक्षण मौसम बदलने के साथ-साथ हमेशा ही बच्चों में दिखाई देते हैं।

पेट में गैस बनना

गर्मी की शुरुआत में बच्चों के पेट में गैस बनना भी शुरू हो जाती है। अगर आप अपने बच्चों को उनकी लिमिट से ज्यादा खाना है खिलाएंगे तो इसके कारण उनके पेट में गैस बन सकती है या फिर उन्हें उल्टियां भी लग सकती है, क्योंकि सर्दियों में तो बच्चों को खाना हजम हो जाता है। लेकिन गर्मियों में उन्हें खाना हजम नहीं हो पाता इसीलिए बच्चों के पेट में गैस बन सकती है।

3. बरसात के मौसम की शुरुआत

जब बरसात के मौसम की शुरुआत होती है तो बरसात के मौसम में भी बच्चों को अनेकों प्रकार की बीमारियां अपना शिकार बना सकती है बल्कि हम तो यही कहेंगे की सबसे ज्यादा बीमारियों का खतरा बच्चों को बरसात के मौसम में ही होता हैं, क्योंकि बरसात के मौसम में हर जगह खतरनाक बीमारियां फैलाने वाले मच्छर बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं जो कि जानलेवा बीमारियां फैलाते हैं।

डेंगू , मलेरिया ( Dengue, Malaria )

बरसात के मौसम में बच्चों को डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियां भी आसानी से हो सकती हैं, क्योंकि बरसात के मौसम में हर जगह पानी भर जाता हैं। अगर आपके घर के आसपास कोई गड्ढा है या फिर आप की छत पर पानी इकट्ठा होता है तो उसमें काफी सारे मच्छर जन्म ले लेते हैं जो कि डेंगू, मलेरिया आदि बीमारियां फैलाने का कारण बनते हैं। बरसात के मौसम में इस प्रकार की बीमारियां आसानी से बच्चों को अपना शिकार बना लेती हैं। इसीलिए बच्चों को मच्छरों से बचाने के लिए माता-पिता को हर संभव प्रयास करने चाहिए।

खाज-खुजली ( Itchy-Rash )

बरसात के मौसम में बच्चों को खाज खुजली भी हो सकती है या फिर उनकी त्वचा पर छोटी-छोटी फुंसियां भी ही निकल सकती हैं जो कि बैक्टीरिया के संपर्क में आने से होती हैं। इसीलिए बरसात के मौसम में आपको अपने घरों में पूरी तरह से साफ सफाई रखनी चाहिए, क्योंकि बरसात के मौसम में सब जगह हानिकारक बैक्टीरिया इकट्ठे हो जाते हैं।

हैजा, टाइफाइड ( Cholera, Typhoid )

बरसात के मौसम में राजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां भी काफी हद तक फैल जाती हैं, क्योंकि इन बीमारियों को फैलाने वाले बैक्टीरिया और परजीवी वातावरण में एक्टिव हो जाते हैं जिसकी वजह से वह एक इंसान से दूसरे इंसान में लगातार इन बीमारियों को फैलाते हैं और इस प्रकार वह सभी को संक्रमित कर देते हैं। इस प्रकार की बीमारियां संक्रामक बीमारियां होती हैं जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलती हैं। इसी वजह से अगर घर के किसी एक सदस्य को यह बीमारी हो जाए तो उसके कारण घर के बाकी सदस्यों को भी यह बीमारियां हो सकती हैं।

चिकनगुनिया ( Chikungunya )

बरसात के मौसम में चिकनगुनिया नाम की बीमारी भी तेजी से बच्चों में फैलती है, क्योंकि बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली काफी कमजोर होती है जिसके कारण वह चिकनगुनिया बीमारी के शिकार हो जाते हैं। चिकनगुनिया बीमारी भी एक विशेष तरह के मच्छर के काटने से फैलती है और इस बीमारी के मच्छर भी संक्रमित व्यक्ति के खून को चूस कर अनेकों व्यक्तियों या फिर बच्चों को संक्रमित करते हैं। इसीलिए इस प्रकार की बीमारियों से बचने के लिए आपको  मच्छरों से बचना आवश्यक हैं।

वायरल बुखार ( Viral Fever )

बरसात के मौसम में वायरल बुखार भी तेजी से फैलता है। यह एक ऐसा बुखार होता है जो कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में वातावरण में स्थित हवा के माध्यम से फैलता है वायरल बुखार एक सामान्य बुखार की तरह ही होता है लेकिन इसके लक्षण सामान्य बुखार से थोड़े अलग होते हैं और वायरल बुखार बच्चों में 4 से 5 दिन तक भी अपना असर दिखा सकता हैं। यह इस प्रकार का बुखार होता है इसमें जब हम बच्चों को दवाइयां देते हैं तो बच्चे कुछ समय के लिए तो बिल्कुल ठीक हो जाते हैं, लेकिन जैसे ही दवाइयों का असर खत्म होता है तो यह बुखार फिर से चढ़ जाता हैं।

आंखों में संक्रमण होना ( Eye Infection )

बरसात के मौसम में हर जगह बैक्टीरिया फैले हुए होते हैं अगर ऐसे में हम अपने घर की पूरी अच्छी तरह सफाई ना करें तो हमारे घर पर मौजूद बच्चे इन बैक्टीरिया की चपेट में आ जाते हैं। जब बच्चों के हाथों पर बैक्टीरिया लगे होते हैं और इन्हीं हाथों से बच्चे अपनी आंखों को खुजाते हैं तो हाथों पर मौजूद बैक्टीरिया के कारण बच्चों की आंखें इन खतरनाक बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाती हैं जिसके कारण आंखों का संक्रमण भी हो सकता है जैसे की आंखें लाल होना, आंखों से बार बार पानी निकलना या फिर आंखों की पलकों पर फुंसी हो जाना आदि।

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फूड-प्वाइजनिंग ( Food-Poisoning )

बरसात के मौसम में छोटे बच्चों को फूड पॉइजनिंग मतलब की खाने की वजह से भी नुकसान हो सकता हैं, क्योंकि बरसात के मौसम में अगर आप अपने बच्चों को बाहर का खाना खिलाते हैं तो बाहर का खाना बैक्टीरिया रहित हो सकता हैं। ऐसा भी हो सकता है कि बाहर के खाने को बनाते समय सावधानी न बरती गई हो जिसकी वजह से उसमें अनेकों व्यक्ति अनेकों बैक्टीरिया या विषाक्त पदार्थ जमा हो गए हो जो कि बच्चे के पेट में जाते ही उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसीलिए बरसात के मौसम में बच्चों को बाहर का खाना बिल्कुल भी ना खाने दें।

बदलते मौसम में बच्चों को बीमारियों से कैसे बचाएं – Protect Children from Diseases in the Changing Season In Hindi ?

अगर आप बदलते मौसम में अपने बच्चों को अनेकों प्रकार की बीमारियों से बचाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको हर एक मौसम के अनुसार योजना बनानी होगी।

1. बरसात के मौसम में छोटें बच्चों को बीमारियों से बचाने के तरीके –

अगर आप बरसात के मौसम में अपने बच्चों को अनेकों प्रकार की बीमारियों से बचाना चाहते हैं, तो आपको बहुत से तरीके आजमाने होंगे जिनसे की बीमारियां फैलती हैं।

घर की साफ सफाई

बरसात के मौसम में आपको अपने घरों की पूरी तरह से साफ सफाई रखनी चाहिए, क्योंकि बरसात के मौसम में हानिकारक बैक्टीरिया और मच्छर उस हर जगह पर पनप जाते हैं जहां पर पानी रुकता हैं। इसीलिए आपको अपने घर में पूरी तरह से साफ सफाई रखनी चाहिए ताकि आपके घर में बैक्टीरिया और मच्छर जन्म ना ले सके।

मच्छर मारने की दवाई का छिड़काव करें

आपको अपने घरों में मच्छरों को मारने की दवाइयों का छिड़काव करते रहना चाहिए क्योंकि जब आपके घरों में मच्छर ही नहीं रहेंगे तो बीमारियां खुद ही नहीं फैलेंगी। कई बार ऐसा होता है कि आप मच्छरों को तो भगा देते हैं या मार देते हैं लेकिन वह फिर से आपके घर में आ जाते हैं। इसलिए आपको रोजाना अपने घर में मच्छर मारने की दवाई का छिड़काव करना चाहिए खासतौर पर घर के टॉयलेट, बाथरूम और रसोई में तो मच्छरों को पूरी तरह से खत्म करना चाहिए।

बच्चों को पूरे कपड़े पहना कर रखें

अगर आप अपने बच्चों को बरसात के मौसम में होने वाली बीमारियों से बचाना चाहते हैं तो आप उन्हें हमेशा पूरे कपड़े पहना कर रखिए, क्योंकि बरसात के मौसम में अगर आप अपने बच्चों को कम कपड़े पहन आएंगे तो उसकी वजह से मच्छरों ने आसानी से काट सकते हैं जिसकी वजह से वह है डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।

बच्चों को रोजाना नहलाएं

आपको अपने छोटे बच्चों को बरसात के मौसम में रोजाना स्नान कराना चाहिए। बेशक आप उन्हें थोड़े गुनगुने पानी से स्नान कर आइए लेकिन उन्हें रोजाना स्नान जरूर कराएं, क्योंकि रोजाना स्नान करने से बच्चे के शरीर पर गंदगी नहीं जमती जिसकी वजह से बच्चा अनेकों प्रकार के बैक्टीरिया से बचा रहता है। इस बात को तो हम सभी जानते हैं कि जब छोटे बच्चे दिन भर खेलते कूदते हैं तो उनके शरीर पर ढेरों बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं। इसलिए आपको अपने बच्चों को नहलाते समय पानी की बाल्टी में 2 से 3 ढक्कन लिक्विड डेटोल के डालने चाहिए ताकि बच्चे को स्नान करवाते समय उसके शरीर पर मौजूद सभी बैक्टीरिया नष्ट हो जाएं।

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बरसात के मौसम में घर के फर्श को साफ रखें

बरसात के मौसम में आपको अपने घर का फर्श पूरी तरह से साफ रखना चाहिए और जब आप अपने घर के फर्श पर पोछा लगाते हैं, तो उस समय आपको पूछे के पानी में लिक्विड डेटोल के 4 से 5 ढक्कन डालने चाहिए ताकि फर्श पर मौजूद सभी बैक्टीरिया नष्ट हो जाए, क्योंकि बच्चों का सबसे पहला प्लेग्राउंड घर का फर्श की होता है।

2. गर्मियों के मौसम में बच्चों को बचाने के तरीके

अगर आप अपने बच्चों को गर्मियों के मौसम में बीमारियों से बचाना चाहते हैं तो आपको बहुत सी बातों पर गौर करना होगा

धूप में बाहर ना जाने दे

गर्मियों के मौसम में धूप काफी तेज हो जाती है सर्दियों के मौसम में तो आपके बच्चे धूप में आसानी से पूरा दिन खेलते रहते हैं, लेकिन जब गर्मियों की शुरुआत हो जाती है तो उस समय आपको अपने बच्चों को धूप के समय घर से बाहर नहीं निकलने देना चाहिए क्योंकि जब बच्चे धूप में जाते हैं, तो उनके सिर पर धूप लगने की वजह से उनकी तबीयत खराब हो सकती है या फिर उन्हें त्वचा संबंधित बीमारी भी हो सकती है इसलिए उन्हें धूप में ना जाने दें।

बच्चों को साफ सुथरा रखें

जब गर्मियों की शुरुआत हो जाती है तो उस समय हमारे आसपास वातावरण में भी बीमारियां फैलाने वाले अनेकों प्रकार के बैक्टीरिया इकट्ठा हो जाते हैं और जब बच्चा बाहर खेलने कूदने के लिए जाता हैं, तो उस समय वह बच्चों के शरीर पर चिपक जाते हैं और जब बच्चा घर पर आकर बिना स्नान करें ही खाना खा लेता है या फिर सो जाता है तो इस प्रकार वह बच्चे को संक्रमित कर देते हैं। इसीलिए जब बच्चा बाहर खेल कूद कर घर पर आता है तो उसे तुरंत ही स्नान करवाना चाहिए।

ज्यादा टाइट कपड़े ना पहनाए

गर्मियों के मौसम में बच्चों को ज्यादा टाइट कपड़े नहीं पहनानें चाहिए बच्चों को हमेशा खुले कपड़े ही पहनाने चाहिए, क्योंकि गर्मियों के मौसम में बच्चे टाइट कपड़े बर्दाश्त नहीं कर पाते और टाइट कपड़ों के कारण उनकी त्वचा पर रैशेज हो सकते हैं और खाज खुजली भी हो सकती है, इसीलिए बच्चों को गर्मियों के मौसम में सिर्फ खुले कपड़े ही पहनाने चाहिए।

पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं

बहुत से माता-पिता अपने बच्चों को गर्मी के मौसम के शुरुआती दिनों में अच्छे से पानी नहीं पिलाते जिसकी वजह से बच्चों के शरीर में पानी की कमी होने लगती हैं। इसलिए अगर आप अपने बच्चे को बिल्कुल स्वस्थ देखना चाहते हैं तो आपको उसे रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना चाहिए, क्योंकि बच्चा जितना ज्यादा पानी पिएगा उतना ही वह स्वस्थ रहेगा इसका एक कारण यह भी है कि पानी के जरिए बच्चे के शरीर में से सभी विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाते हैं। इसलिए बच्चा अनेकों प्रकार की बीमारी से बचा रहता हैं।

खाने पीने का ध्यान रखें

गर्मियों के मौसम में आपको अपने बच्चे को बासी खाना बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए या फिर बाहर का खाना भी नहीं खिलाना चाहिए। आपको गर्मी के मौसम में अपने बच्चे को घर पर बना ताजा खाना खिलाना चाहिए।

ज्यादा गर्म पानी में नहलाए

जब गरीबों के मौसम की शुरुआत हो जाती हैं, तो उस समय आपको यह बात भी समझ लेनी चाहिए कि अगर आप अपने बच्चे को ज्यादा गर्म पानी से नया लाते हैं तो उसके कारण उसके शरीर पर घमौरियां हो सकता हैं। इसलिए बच्चों को सामान्य पानी से ही महिलाएं या फिर गुनगुने पानी से नहलाएं।

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3. सर्दियों के मौसम में बच्चों को बीमारियों से कैसे बचाएं

आप सर्दियों के मौसम में अपने बच्चों को बीमारियों से बड़ी आसानी से बचा सकते हैं, इसके लिए बस आपको थोड़ी सी बातें समझने की आवश्यकता है।

गर्म कपड़े पहनाए

सर्दियों के मौसम की शुरुआत होती ही आपको अपने बच्चों को थोड़े गर्म कपड़े पहनाने शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि सामान्य गर्मी के कपड़ों में बच्चे को ठंड भी लग सकती है जिसके कारण उसे जुखाम भी हो सकता है इसीलिए बच्चों को मौसम के हिसाब से गर्म कपड़े पहनाने शुरू कर दें।

ठंडी चीजें ना खाने दे

सर्दियों के मौसम में अगर आपका बच्चा खाने की ठंडी चीजें खाता है या फिर ठंडा पानी पीता हैं, तो उसकी वजह से भी उसे खांसी हो सकती है और गला भी खराब हो सकता हैं, इसलिए अपने बच्चों को सर्दियों के मौसम की शुरुआत होते ही गर्म खाना खिलाएं और पानी भी गुनगुना ही पिलाएं ताकि उनका स्वास्थ्य ठीक रह सकें।

जब तक धूप ना निकले तब तक घर से बाहर ना निकलने दे

जब सर्दियों के मौसम की शुरुआत होती है तो उस समय मौसम काफी ठंडा हो जाता है। इसीलिए जब तक धूप ना निकले तब तक अपने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने देना चाहिए, क्योंकि घर से बाहर ठंडी हवा चल रही होती है और वह ठंडी हवा बच्चे के कानों में लग सकती है जिसकी वजह से आपका बच्चा बीमार हो सकता हैं।

कानों को ढक कर रखें

अगर आपके बच्चे हैं 3 साल से कम उम्र के हैं तो सर्दी के मौसम की शुरुआत होते ही अपने बच्चे के गानों को भी ढक कर रखें, क्योंकि कानों के माध्यम से ही बच्चों को ठंड लगती हैं और फिर ठंड लगने की वजह से ही उन्हें दस्त लग जाते हैं या फिर उल्टियां लग जाती है इसीलिए उनके कानों को भी ढक कर रखें।

Conclusion –

बच्चों को मौसम बदलते समय किस प्रकार बचा कर रखना चाहिए और मौसम बदलने पर बच्चों के माता-पिता को किन-किन चीजों का ख्याल रखना चाहिए जिससे कि बच्चे को नुकसान पहुंचता है उसके बारे में भी हमने बता दिया हैं। इसके अतिरिक्त हमने इस पोस्ट में आपको Badalte Mosam Me Bacho Ka Khayal Kaise Rakhe तथा Winter Baby Care Tips In Hindi के बारे में बता दिया हैं। इसके अतिरिक्त इस पोस्ट में आपको Summer Baby Care Tips In Hindi तथा Monsoon Baby Care Tips In Hindi के विषय में भी बताया है अभी यदि आपको हमसे Monsoon Baby Care Tips In Hindi के बारे में हम से कोई भी सवाल पूछना हों, तो कमेंट सेक्शन में कमेंट करें। धन्यवाद

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