जन्म के पश्चात बच्चे की ग्रोथ कैसे होती हैं –  जानिए Baby’s Growth Chart After Birth In Hindi  ?

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Dr. Arti Sharma
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Dr. Arti Sharma is a certified BAMS doctor with at least 2 years of article writing experience on various medication and therapeutic lines. She is known for her best work in ayurvedic medication knowledge and there uses. Her hobbies including reading books and writing articles. With a good grip in sports, she uses to play for her university cricket team as a captain. Her work for ayurvedic is well known. डॉ आरती शर्मा एक प्रमाणित BAMS डॉक्टर है जिन्हे कम से कम 2 साल का विभिन्न दवाइयों और चिकित्सीय रेखाओं पर लेखन का अनुभव है। वह आयुर्वेदिक दवाओं के ज्ञान और उनके उपयोग में अपने बेहतरीन काम के लिए जानी जाती हैं। उनका शौक किताबें पढ़ना और लिखना है। खेलों में अच्छी पकड़ के साथ, वह एक कप्तान के रूप में अपनी विश्वविद्यालय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुकी हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में उनका काम अच्छी तरह से जाना जाता है।
Baby’s Growth in Hindi Table Of Content

जन्म के पश्चात बच्चे की ग्रोथ कैसे होती हैं –  जानिए Baby’s Growth Chart After Birth In Hindi  ?

जब बच्चा जन्म लेता है तो जन्म के पश्चात आपको अपने बच्चे के बारे में बहुत सी चीजें पता होना आवश्यक हैं, क्योंकि बहुत से बच्चों का विकास का भी धीरे-धीरे होता है जिसकी वजह से उन्हें आगे चलकर काफी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता हैं, इसीलिए इस प्रकार के बच्चों के माता-पिता को उनका पूरा ध्यान रखना होता है ताकि उनके शरीर का विकास बिना रुके तेजी से हो सके और वह भी दूसरे बच्चों की तरह ही रह सके।

आज के समय में गर्भावस्था के समय में माताओं की जीवन शैली काफी खराब रहती है जिसका बुरा प्रभाव उनके बच्चे पर पड़ता हैं, क्योंकि बच्चे की माता के माध्यम से ही बच्चे को हर एक प्रकार का पोषण मिलता है जिससे कि आगे चलकर उसके शरीर का विकास होता हैं।

इसीलिए बच्चे के विकास में बच्चे की माता की ही अहम भूमिका होती है। आपको अपने बच्चे के विकास से संबंधित सभी बातों का पता होना आवश्यक है कि, किस प्रकार जन्म के पश्चात कितने हफ्तों में बच्चों का कितना विकास होना चाहिए और जन्म के पश्चात कितने महीने में बच्चे का कितना अधिक विकास होना आवश्यक हैं। यदि आपको इन बातों का पता होगा तो आप अपने बच्चे को स्वस्थ रख सकेंगे।

आज की इस पोस्ट के माध्यम से हम जानेंगे कि Bache Ki Growth Kaise Hoti Hai तथा Baby’s Growth Chart In Hindi इसी के साथ-साथ हम आपको 1 Month Ke Bache Ka Vikas तथा Bacho Ki Lambayi Kaise Badhti Hai इसके बारे में भी पूरी जानकारी देंगे, ताकि आपको बच्चे के विकास से संबंधित पूरी जानकारी मिल जाए।

जन्म के पश्चात 2 महीने तक के बच्चे का वजन और हाइट कितनी होनी चाहिए -  What Should Be the Weight and Height of the Baby Up to 2 Months After Birth In Hindi ?

जन्म के पश्चात 2 महीने तक के बच्चे का वजन और हाइट कितनी होनी चाहिए –  What Should Be the Weight and Height of the Baby Up to 2 Months After Birth In Hindi ?

जब आपका बच्चा जन्म के पश्चात 2 महीने का हो जाता हैं, तो 2 महीने की आयु में आपके बच्चे का वजन और लंबाई भी थोड़ी सी बढ़ने लगती हैं अगर कोई 2 महीने की लड़की हैं, तो उस लड़की की लंबाई 57 सेंटीमीटर तक हो सकती है और उसका वजन 4.2 किलो से लेकर 5.6 किलो तक हो सकती हैं। इसी प्रकार अगर कोई लड़का 2 महीने का हैं, तो उस लड़के की लंबाई 58 सेंटीमीटर तक हो सकती है और उसका वजन 4.5 किलोग्राम से लेकर 6.2 किलोग्राम तक हो सकता हैं।

वैसे तो बच्चे का विकास उसकी माता के ऊपर भी निर्भर करता हैं, अगर बच्चा गर्भ में बिल्कुल सुरक्षित था और उसे सभी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मिल रहे थें, तो उसकी लंबाई तथा वजन इससे ज्यादा भी हो सकता हैं। अगर किसी बच्चे को माता के कमजोर होने के कारण सभी पोषक तत्व नहीं मिल पाते या फिर कोई बच्चा अगर समय से पहले ही जन्म ले लेता हैं, तो इस प्रकार के बच्चों का वजन और हाइट काफी कम हो सकती हैं, क्योंकि उनका विकास फिर जन्म के पश्चात ही धीरे-धीरे होता है जिसमें उन्हें काफी समय लग जाता है।

जन्म के बाद 1 महीनें कें बच्चे के शरीर का कितना विकास हो जाता हैं – How Much Development of the Child’s Body in 1 Month After Birth In Hindi ?

जन्म के पश्चात 1 महीने तक आपके बच्चे का धीरे-धीरे विकास होता हैं। जन्म के पश्चात 4 हफ्तों में आपका बच्चा शारीरिक मानसिक तथा भावनात्मक रूप से भी विकसित हो जाता है और वह अब काफी चीजों को पहचानने भी लगता है जैसे कि :-

1. मस्तिष्क का विकास

जब आपका बच्चा 4 हफ्तों का होता हैं, तो आपके बच्चे का मस्तिष्क भी अब धीरे-धीरे विकसित हो रहा होता हैं। अब बच्चा आसानी से कहीं से भी आवाज सुनकर तुरंत ही उधर देखने लगता है और बच्चे को अपनी माता की आवाज की भी पहचान रहती है जिसे वह याद रख पाता हैं।

2. मांसपेशियों का विकास

अब आपके बच्चे की मांसपेशियों का विकास भी तेजी से हो रहा होता है और काफी हद तक मांसपेशियों का विकास हो भी चुका होता हैं। अब आपका बच्चा अपने हाथ पैर को भी काफी जल्दी-जल्दी से हिला सकता है और हाथों की उंगलियों को भी पूरी तरह हिला सकता हैं। अब आपके बच्चे की मांसपेशियां धीरे-धीरे पहले से काफी ज्यादा मजबूत होती जा रही हैं। इसी के साथ-साथ आप बच्चे की गर्दन की मांसपेशियां भी पूरी तरह से विकसित होने लगती हैं।

3. रीड की हड्डी

जन्म के पश्चात 4 हफ्तों में आपके बच्चे की ही रीड की हड्डी भी धीरे-धीरे पहले से ज्यादा मजबूत बन रही हैं, क्योंकि रीड की हड्डी के सहारे ही आपका बच्चा खड़ा हो पाएगा जिससे कि वह सीधा होकर चल भी पाएगा। इसीलिए जन्म के पश्चात से ही रीड की हड्डी का विकास तेजी से शुरू हो जाता है ताकि बच्चा जल्दी ही बैठ सकें। क्योंकि बच्चा रीड की हड्डी की वजह से ही बैठ पाता है और यदि रीड की हड्डी जल्दी ही मजबूत हो जाएगी, तो फिर बच्चा जल्दी ही बैठना भी सीख पाएगा।

4. गतिशील चीजों को देखना

अब आपके बच्चे का इतना विकास भी हो चुका होता है कि, वह अपने आसपास की चीजों को तुरंत ही देख लेता हैं, अगर आप अपने बच्चे के पास से गुजरेंगे या फिर आप अपने बच्चे के आसपास कोई चीज भी लाते हैं जैसे कि बचपन में बच्चों को खिलौनों से खिलाते हैं। यदि आप बच्चे के आसपास इस प्रकार की प्रतिक्रिया करेंगे तो आपका बच्चा तुरंत ही गर्दन हिलाकर उधर देखने लगेगा, क्योंकि अब बच्चे की गर्दन की मांसपेशियों भी काफी मजबूत हो जाती हैं।

5. शरीर के अंगों पर नियंत्रण

जन्म के पश्चात 4 हफ्तों में आपका बच्चा अपने शरीर के अंगों पर भी थोड़ा थोड़ा नियंत्रण पाना सीख लेता हैं। इसीलिए आपका बच्चा अब तेजी से अपने हाथ पैर भी हिलाता हैं। उसके हाथ-पैर हिलते देखकर आप इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि, बच्चा अब अपने शरीर के अंगों पर धीरे-धीरे नियंत्रण पा रहा है जिसकी वजह से वह हाथ पैर तो हिलाता ही हैं, बल्कि मांसपेशियों के विकसित होने के कारण भी वह तेजी से हाथ पैर हिला पाता हैं।

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6. आंखों का विकास

अब आपके बच्चे की आंखों का भी धीरे-धीरे विकास हो रहा होता है। जन्म के पश्चात 4 हफ्तों में बच्चे की आंखों का पहले से ज्यादा विकास हो चुका होता है और वह अब आसपास की चीजों को बड़ी आसानी से देख सकता हैं। लेकिन तेज रोशनी को सहन नहीं कर सकता, क्योंकि अभी बच्चे की आंखें इतनी ज्यादा विकसित नहीं हुई हैं कि वह तेज रोशनी को सहन कर सके।

7. मुस्कुराना

जन्म के पश्चात अब आपके बच्चे की चेहरे की मांसपेशियां भी काफी ज्यादा विकसित हो जाती हैं, जिसकी वजह से बच्चा आसानी से मुस्कुरा भी सकता है और अपने मुंह से कई प्रकार की प्रतिक्रिया दिखा सकता हैं। मुंह की मांसपेशियों का विकास होने के कारण ही बच्चा रोते समय अलग-अलग तरह के मुंह बनाता हैं।

1 महीने के बच्चे की ज्ञानेंद्रियां किस तरह विकसित होती हैं – How the Senses of a 1 month Old Baby Develop In Hindi ?

जब आपका बच्चा 1 महीने का हो जाता हैं, तो आपका बच्चा अपने आसपास के वातावरण के प्रति भी काफी जागरूक होने लगता है। अब आपके बच्चे की दृष्टि तथा सुनने की क्षमता भी काफी ज्यादा बेहतर होती जा रही हैं। इसीलिए वह अपने आसपास होने वाली गतिविधियों पर भी काफी अधिक ध्यान देता हैं।

आपने कई बार देखा होगा जब छोटे बच्चों के आस-पास से कोई भी आवाज आती है, तो वह अपना चेहरा तुरंत ही घुमा कर उस आवाज को ध्यान से सुने लगते हैं और यदि आप उन्हें कोई रंगीन खिलौना दिखाते हैं या फिर कोई ऐसा खिलौना देते हैं जिससे कि कोई आवाज आती हैं, तो इस प्रकार के खिलौनों को देखकर भी बच्चा एकदम से चौंक जाता हैं।

बच्चा कब अपना सिर ऊपर उठाने लगता हैं – When Does Baby Start to Raise his Head In Hindi ?

जब आप अपने बच्चे को अपनी गोद में उठाते हैं और आप उसकी गर्दन को पूरा सहारा देते हैं, लेकिन आपके बच्चे की गर्दन की मांसपेशियां जन्म के 1 महीने के पश्चात काफी हद तक विकसित हो जाती हैं, लेकिन फिर भी आपको अपने बच्चे की गर्दन पर हाथ रखना होता हैं। जब आपका बच्चा पीठ के बल लेटा होता है, तो उस समय वह अपनी गर्दन थोड़ी सी हिला दुला भी सकता है और अपना सिर भी ऊपर की ओर उठा सकता हैं, हमें अपने बच्चों को दिन में थोड़ी देर पेट के बल भी लेट आना चाहिए, क्योंकि पेट के बल लेटने से बच्चों की मांसपेशियां काफी जल्दी विकसित होती हैं।

जन्म के पश्चात 1 महीने में आपका बच्चा आसानी से अपना सिर ऊपर उठा सकता हैं। ऐसा भी हो सकता है कि 1 महीने से पहले भी आपका बच्चा अपना सिर उठाना शुरू कर दें और कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं, जो 1 महीने के समय में भी अपना सिर ऊपर उठाना शुरू नहीं करते।

बच्चा चीजों को पकड़ना कब शुरु करता है – When Does Baby Start to Hold Things In Hindi ?

जन्म के पश्चात 4 हफ्तों में बच्चे को यह एहसास होने लगता है कि, उसकी बाजू तथा टांगे उसके शरीर का ही हिस्सा हैं। इसीलिए वह मांसपेशियों के मजबूत होने के कारण उन्हें हिलाने-डुलाने भी लगता है। जब आप 1 महीने के बच्चे के हाथों में कोई चीज पकड़ आएंगे तो है तुरंत ही पकड़ लेगा। यहां तक कि जब आप उसे अपनी उंगली पकड़ आएंगे तो वह आपकी उंगली को तुरंत ही पकड़ लेता हैं।

वैसे तो 1 महीने से कम उम्र के बच्चे भी आसानी से चीजों को पकड़ सकते हैं, लेकिन उनकी पकड़ने की क्षमता इतनी ज्यादा तेज नहीं होती जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती रहती है ठीक उसी प्रकार उनकी पकड़ने की क्षमता भी बढ़ जाती हैं।

आप अपने बच्चे के साथ ऐसा खेल भी खेल सकते हैं, जिससे कि उसे अपने शरीर के बारे में भी जानने में मदद मिलेगी, जैसे कि आप अपने बच्चे के पेट पर गुदगुदी भी कर सकते हैं, जिससे कि आपका बच्चा तुरंत ही हाथ पैर हिलाने लगेगा, अपनी आंखों को बंद करेगा और खुलेगा इस प्रकार आपको अपने बच्चे के अंगों के बारे में पता चल जाएगा।

आप इस बात को भी जान सकते हैं कि बच्चे की पकड़ कितनी ज्यादा मजबूत हैं। इसके लिए आपको अपने बच्चे के हाथ में बहुत ही नरम सा कोई कपड़ा देना होगा और उसे पकड़वाना होगा और फिर आपको उस कपड़े को धीरे-धीरे खींचकर देखना हैं, इससे आपको इस बात का पता चलेगा कि आप भी आपके बच्चे की पकड़ कितनी मजबूत हैं।

शिशु में खुद को अभिव्यक्त करने का तरीका किस प्रकार विकसित होता है – How the Child Develops the Way of Expressing Himself In Hindi ?

आपका शिशु एक महीने में कुछ नहीं अधिक सक्रिय हो चुका होता हैं। आपका बच्चा अब अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए गरारे करने जैसी आवाजें भी निकालता है और जब आप अपने बच्चे के साथ धीमे स्वर में कुछ बात कर रहे होते हैं तो वह घूर-घूर जैसे स्वर भी निकालता है। जब आप अपने बच्चे के सामने खड़े होकर उसकी आंखों से आंखें मिलाकर उसके साथ बातें करने की कोशिश करते हैं, तो उस समय आपका बच्चा भी आप से पूरी तरह नजरें मिला लेता है और आपके मुंह की तरफ देखने लगता है।

1 महीने का बच्चा कुछ शुरुआती किलकारियां भरना भी शुरू कर देता है यदि आप अपने घर में कुछ काम कर रहे हैं और उसके आसपास नहीं हैं, तो आपका शिशु आपको बुलाने की कोशिश किलकारियां मारने से करता हैं। इसलिए आपको दूर होने पर भी अपने बच्चे के लिए कोई गाना गाना चाहिए, क्योंकि जब आपका बच्चा दूर से आई हुई आवाज को सुनता हैंष तो वह बड़े ही ध्यान से उन आवाजों को सुनकर खुश होता हैं।

आपका शिशु जन्म के 2 महीने तक अपने माता पिता को भी अच्छी तरह पहचाने लगता है और उसकी आवाज को भी पूरी तरह पहचानने लगता हैं।

1 महीने के बच्चे लगभग इस प्रकार को भी बरसाना शुरू कर देते हैं कि, वह अपने मां-बाप को पूरी तरह पहचानते हैं और जब उनके माता-पिता उनके सामने आते हैं, तो वह अलग-अलग प्रतिक्रिया भी दिखाते हैं, जिससे कि उनके माता-पिता इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि उनका बच्चा उन्हें जानने लगा है और कहीं बाहर यदि बच्चा काफी ज्यादा रो रहा होता हैं, तो अपने माता-पिता को अपने पास देखकर काफी जल्दी शांत भी हो जाता है।

क्या 1 महीने के बच्चे को संगीत सुनना अच्छा लगता हैं – Does 1 Month Old Baby Like to Listen to Music In Hindi ?

जब बच्चा 1 महीने का हो जाता है तो वह पहले की अपेक्षा थोड़ा कम सोता हैं, क्योंकि जब बच्चों का जन्म होता है जब तो वह 18 से 20 घंटे तक भी नींद लेते हैं, लेकिन जब बच्चा 1 महीने का हो जाता है तो वह 16 से 17 घंटे की नींद ही लेता हैं।

जब आप अपने बच्चे के 1 महीने के हो जाने पर उसको लोरिया गाकर सुनाती हैं या फिर धीमी की आवाज में कोई संगीत लगा देती हैं, तो उसके कारण आपका बच्चा काफी जल्दी सो जाता है या फिर उस ध्वनि को काफी ध्यान से सुनता हैं।

आप जितना ज्यादा अलग अलग तरह का संगीत चलाएंगें, तो उतना ही आपके शिशु के लिए बेहतर होगा। क्योंकि अलग-अलग प्रकार के संगीत सुनने के कारण आपके बच्चे को किसी एक ही संगीत की आदत नहीं होगी और जैसे-जैसे वह बड़ा होता रहेगा, तो आप उसे अलग-अलग तरह से जीने के तरीके भी सिखा पाएंगे। इस प्रकार बच्चे को किसी एक चीज की आदत नहीं रहेगी।

1 महीने का बच्चा कितना अच्छा देख सकता है - How well Can a 1 Month Old Baby See In Hindi ?
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वैसे तो इतनी कम उम्र में आपके छोटे बच्चे को यह सब समझ में नहीं आता, लेकिन फिर भी छोटे बच्चों को संगीत सुनना बेहद ही पसंद होता है और इससे वह शांत भी हो जाते हैं। यदि आपका बच्चा काफी ज्यादा रो रहा है और आप उसके आसपास संगीत चला देते हैं, तो वह तुरंत ही चुप हो जाता है और सिर्फ संगीत की ध्वनि को सुनता रहता हैं, संगीत सुनने के कारण आपका बच्चा चिड़चिड़ा भी नहीं होता।

1 महीने का बच्चा कितना अच्छा देख सकता है – How well Can a 1 Month Old Baby See In Hindi ?

जब आपका शिशु 1 महीने का हो जाता है तो वह अपनी दोनों आंखों से ध्यान केंद्रित करना अच्छे से सीख जाता हैं। इसीलिए वह चलती हुई चीज पर अपनी नजरों को बनाए रखता है या फिर आप उसके चेहरे के बिल्कुल सामने अगर कोई खिलौना रखेंगे, तो आपका बच्चा उसको काफी अच्छी तरह देख सकता हैं।

आप अपने बच्चे की नजरों को ठीक करने के लिए उसकी नजरों के साथ अपनी नजरें मिलाने वाला खेल भी खेल सकती हैं, जिससे कि आपके बच्चे का देखने का नजरिया विकसित होगा और वह अपनी आंखों को घुमाना भी सीख जाएगा।

वैसे तो शिशु की आंखों को विकसित करने के लिए बाजार में बहुत से ऐसे खिलौने मिलते हैं जिनसे खेलने पर शिशु की आंखें काफी अच्छी तरह काम करने लगती हैं।

अपने शिशु आंखों को और भी ज्यादा फुर्ती ली बनाने के लिए आप उसकी आंखों को इधर-उधर घुमाने वाला खेल भी उसके साथ खेल सकती हैं जैसे कि आप कोई भी चमकीली चीज अपने हाथ में ले लीजिए और उसके पश्चात उसे शिशु को दिखा कर इधर-उधर घुमाते रही हैं। इस प्रकार आपका बच्चा अपनी आंखें घुमा घुमा कर उस चीज को देखेगा इस प्रकार भी आपके बच्चे की आंखें विकसित होती हैं।

हमें कैसे पता चलेगा कि बच्चे का विकास सही हो रहा हैं – How Do We Know if the Baby is Growing Well In Hindi?

हमारे लिए यह जानना बहुत ही जरूरी होता है कि हमारे बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं हो रहा। इसीलिए आप जब आपका बच्चा 1 महीने का हो जाता हैं, तो उस समय भी उसके शरीर के अंगो की जांच कर सकते हैं जैसे कि :-

बच्चे की एक महीने के हो जाने पर आप बच्चे के साथ कुछ इस प्रकार का खेल खेल सकती हैं, जैसे कि उसकी आंखों के बारे में पता चलेगा कि उसे बिल्कुल सही दिख रहा है जैसे कि आप उसकी आंखों के बिल्कुल पास कोई चीज लेकर जाइए। यदि वह उस चीज को देखकर प्रतिक्रिया कर रहा हैं, तो इसका मतलब उसे बिल्कुल सही लिखता है और इसी प्रकार आप बच्चे की दूर की नजर भी चेक कर सकते हैं जिससे कि आंखों के बारे में पता लगेगा।

अगर आपका बच्चा निरंतर अपने हाथ पैर हिलाता रहता हैं, तो इसका मतलब यह है कि उसके हाथ पैर बिल्कुल स्वस्थ हैं और उसे किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं हैं। यदि आपका बच्चा 1 से 2 महीने के अंदर हाथ पैर हिलाने शुरू ना करें तो फिर आपके लिए यह चिंता वाली बात हो सकती हैं, क्योंकि 1 से 2 महीने के बच्चे पूरी तरह से हाथ पैर हिलाना सीख जाते हैं क्योंकि उनकी मांसपेशियां पूरी तरह से विकसित हो जाती हैं। यदि आपका बच्चा हाथ पैर नहीं ला पा रहा हैं, तो इस विषय में आपको तुरंत डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।

बच्चे की गर्दन की मांसपेशियों के बारे में जानने के लिए आप बच्चे की दूसरी तरफ खड़ी होकर कोई प्रतिक्रिया कर सकती हैं। अगर बच्चा आपकी तरफ देखने की कोशिश करता है और गर्दन ही लाता है तो इसका मतलब यह है कि, आपके बच्चे की गर्दन की मांसपेशियों बिल्कुल सही कार्य कर रही हैं और उसका विकास सही हो रहा हैं।

आपको अपने बच्चे का वजन भी निरंतर चेक करते रहना चाहिए, क्योंकि बच्चे का वजन कम होने के कारण भी बच्चे के विकास में वह बाधा बन सकता हैं। इसलिए आपको निरंतर ही अपने बच्चे के वजन पर भी ध्यान देना चाहिए और यदि उसके शरीर का वजन नहीं बढ़ रहा है और वह पतला हैं, तो फिर आपको बच्चों के डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

Conclusion

बच्चे के जन्म के पश्चात उसका विकास किस प्रकार होता है और कौन-कौन सी गतिविधियां वह जन्म के पश्चात कर सकता है इन सब के बारे में हमने आपको विस्तार से बता दिया हैं। इसके अतिरिक्त हम सब ने आज इस पोस्ट के माध्यम से Bache Ki Growth Kaise Hoti Hai तथा Baby’s Growth Chart In Hindi के बारे में बताया हैं।

 इसी के साथ-साथ हमने आपको 1 Month Ke Bache Ka Vikas तथा Bacho Ki Lambayi Kaise Badhti Hai इसके बारे में भी बता दिया हैं। अब अगर आपको हमसे Baby’s Growth Chart In Hindi के बारे में पूछना हो तो कमेंट सेक्शन में कमेंट करें। धन्यवाद

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