Covid-19 के बाद के मरीजों में न्यूरोलॉजिकल मुद्दों में वृद्धि, ब्रेन हैमरेज के आपातकालीन मामले आए सामने

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Ankit Kumar
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Covid-19 के बाद के मरीजों में न्यूरोलॉजिकल मुद्दों में वृद्धि, ब्रेन हैमरेज के आपातकालीन मामले आए सामने

दिल्ली के मूलचंद अस्पताल ने जानकारी दी है कि कोरोना के बाद रोगियों में ब्रेन हेमरेज जैसे आपातकालीन न्यूरोलॉजिकल मामलों में वृद्धि हो रही है। ओपीडी में 60% लोग कोविड-19 या कोविड-19 होने के बाद चिंता और अवसाद, आत्महत्या के विचार, अकेलेपन की चिंता जैसे मानसिक स्वास्थ्य के मामलों की वृद्धि कर रहे हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि covid मरीजों में परेशान करने वाली बढ़ोतरी हो रही है जिसमें न्यूरोलॉजिकल मामला भी शामिल है। ब्रेन हैमरेज के मामले मूलचंद अस्पताल में बढ़ते ही जा रहे हैं। दिल्ली के मूलचंद अस्पताल में ओपीडी के 50% विभाग ऐसे न्यूरोलॉजी समस्याओं के मामलों से बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि जो व्यक्ति इस कोविड-19 महामारी से बच गए हैं या उन से संक्रमित हैं उन्हें कई हफ्तों में सिर दर्द, थकान, भूलने की बीमारी, चिंता, स्ट्रोक, चक्कर आना जैसी कई मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और इन समस्याओं से निकलने के लिए अस्पताल में भर्ती के लिए आ रहे हैं। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि ओपीडी ऐसे मरीजों से भरी हुई है जिन्हें आत्महत्या के विचार, अकेलेपन की भावना, सिरदर्द, चिंता जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो रही है। न्यूरो सर्जन डॉ आशा बक्शी का कहना है कि इनमें से अधिक मामले उन मरीजों के हैं जो बीते महीनों में कोविड-19 से संक्रमित हुए थे।

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डॉ आशा बक्शी का कहना है कि कोविड-19 जैसी महामारी ना केवल फेफड़ों की समस्या को बढ़ाती है बल्कि न्यूरोलॉजिकल और मानसिक समस्याएं भी उत्पन्न कर देती है। उन्होंने एक रिपोर्ट के बारे में बताते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तियों में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं ज्यादातर पाई गई है जो कोविड-19 से संक्रमित हुए थे। उस रिपोर्ट में बताया गया है कि 80% कोविड-19 मरीजों में 36% मरीजों में अवसाद, चिंता जैसे कई लक्षण मिल रहे हैं। उस रिपोर्ट के मुताबिक मरीजों में स्ट्रोक जैसी मानसिक स्थिति और मानसिक समस्याएं की सूचना अधिक है।

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न्यूरोलॉजिकल डिस्फंक्शन की ग्लोबल कंसोर्टियम स्टडी की एक रिपोर्ट के अनुसार कोविड-19 के मरीजों में 26% लोगों में एनोसमिया और एजुसिया जैसी समस्याओं की रिपोर्ट पाए गए हैं। डॉ आशा बक्शी ने आगे कहा कि इस तरह के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामले उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन पर भी बुरी तरह से असर कर रहे हैं। उनके अनुसार लोगों ने यह भी शिकायत की है कि काम के दौरान उनका ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है जिसके कारण कामों से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

अमेरिका की दिसंबर में की गई जनगणना के अनुसार 42% लोग अवसाद और चिंता जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। मूलचंद अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉक्टर बक्शी ने बताया कि यह न केवल अमेरिका में बल्कि विदेशों में भी ऐसे ही आंकड़े पाए गए हैं।

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भारत के असम राज्य के सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोगों में 5% लोगों में आत्महत्या के विचार और 40% लोगों में चिंता की समस्या पाई गई है। डॉ आशा बक्शी ने आगे बताया कि ऐसे न्यूरोलॉजिकल और मानसिक स्वास्थ्य के मामले पर ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह मानसिक समस्याएं बड़ी आबादी में लोगों को प्रभावित कर रही है इसलिए इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है।

बीते शनिवार को आकाश हेल्थकेयर ने जानकारी दी कि पिछले तीन चार हफ्तों में कोविड-19 महामारी के मरीजों के मिलने के बाद अस्पताल में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की 20-25 मामले देखने को मिले हैं। इन सभी मामलों में मायोपैथी और माइग्रेन का सिरदर्द, कोमा, पोस्ट कोविड-19, एलोपैथी जैसी समस्याएं सामान्य थी। इन सभी में सिंड्रोम जैसे दुर्लभ स्थिति भी शामिल है। डॉक्टर और न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि बुजुर्गों में व्यवहार की प्रगतिशील गिरावट आई है और वही बच्चों में ऐसी स्थितियां कम देखी जा रहे हैं। आमतौर पर कोवीड मरीजों के ठीक होने के बाद विभिन्न स्थिति के प्रश्न उन्हें चिंता में डालते हैं इसलिए यह मानसिक समस्या बढ़ती जा रही है।

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