Cradle Cap: नवजात शिशु के सिर पर पपड़ी क्यों जमती हैं – जानिए सिर पर पपड़ी जमने के कारण, बचाव व इलाज ?|Why does a newborn baby have Cradle Cap problems – know the causes, prevention and best treatment ?

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Dr. Nick Kumar Jaiswal
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He is a professional blog writer for more than 2 years, he holds a degree in Doctorate in Pharmacy(Pharm D) with experience in medicine dispensing and medication ADRs. His interest in medicine makes him excellent in his research project. Now he prefers to write blogs about medications and diseases. His hobbies include football and watching Netflix. He loves reading novels and gain knowledge about more medication ADRs. He is very helpful in nature and you will often find him helping others in the treatment. डॉ जयसवाल 2 से अधिक वर्षों से एक पेशेवर ब्लॉग लेखक है, ये दवा वितरण और दवा एडीआर में अनुभव के साथ एक फार्म डी डिग्री होल्डर है। चिकित्सा में उनकी रुचि उन्हें अपनी शोध परियोजना में उत्कृष्ट बनाती है। अब वह दवाओं और बीमारियों के बारे में ब्लॉग लिखना पसंद करते हैं। उनके शौक में फुटबॉल और नेटफ्लिक्सिंग, उपन्यास पढ़ना और अधिक दवा एडीआर के बारे में ज्ञान प्राप्त करना शामिल है। वह प्रकृति में बहुत मददगार है और अक्सर आप इन्हे दूसरों की इलाज में मदद करते हुए देख पाएंगे ।
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Cradle Cap : नवजात शिशु के सिर पर पपड़ी क्यों जमती हैं – जानिए सिर पर पपड़ी जमने के कारण, बचाव व इलाज ?

नवजात शिशुओं को बचपन में अनेकों प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं उन्हीं बीमारियों में से एक है सिर पर पपड़ी जम जाना। सिर आपने बहुत से छोटे बच्चों को देखा होगा जिनकी माताएं उन्हें साफ सुथरा नहीं रखती तो ऐसे बच्चों के सिर पर पपड़ी जम जाती है या फिर पपड़ी जमने के और भी बहुत से कारण होते हैं।

नवजात शिशुओं में यह बीमारी काफी आम है जो 100 में से 60 नवजात शिशुओं में देखी जाती है। सर पर पपड़ी जमना एक ऐसी बीमारी होती है जिसमें बच्चा काफी ज्यादा परेशान हो जाता है और उसके सिर पर काफी ज्यादा खारिश भी होने लगती है यह पपड़ी पहले तो सिर के थोड़े से हिस्से में ही होती हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह रोकथाम ना करने की वजह से पूरे सिर पर फैल जाती हैं।

इसीलिए सफेद पपड़ी का इलाज तुरंत ही करना पड़ता है अगर आपको शुरुआत में ही पता चल जाता है कि बच्चे के सिर पर पपड़ी जम रही हैं, तो शुरुआत में ही इसका इलाज शुरू कर देने से यह आगे नहीं बढ़ती और इसका इलाज भी बड़ी जल्दी हो जाता है। बहुत से लोग तो सिर पर पपडी जमने के पश्चात अनेकों प्रकार के घरेलू नुस्खे भी इस्तेमाल करते हैं लेकिन घरेलू नुस्खे भी किसी किसी बच्चे पर ही असर करते हैं।

इसलिए आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको Cradle Cap Causes In Hindi तथा Prevention Of Cradle Cap In Hindi के बारे में बताएंगें। इसी के साथ-साथ हम आपको Treatment Of Cradle Cap In Hindi तथा Complication Of Cradle Cap In Hindi के बारे में भी बताएंगें, ताकि आप आसानी से अपने बच्चे के सिर पर पपड़ी जमने से रोक सकें।

Cradle Cap क्या है – What is Cradle Cap In Hindi ?

जब नवजात शिशुओं की खोपड़ी की त्वचा पर पपड़ी जमना शुरू हो जाती हैं, तो इस प्रकार की पपड़ी जमने को Cradle Cap कहा जाता हैं। यह इस प्रकार की समस्या होती हैं जो कि अक्सर शिशु के जन्म के पश्चात 3 महीने तक की आयु में यह समस्या देखी जाती हैं। क्रैडल कैप वैसे तो बच्चों को अंदरूनी नुकसान नहीं पहुंचाती। लेकिन इसकी वजह से त्वचा काफी ज्यादा प्रभावित होती हैं, क्योंकि जब त्वचा पर पपड़ी जम जाती है तो थोड़े दिन तो यह सामान ने पकड़ी की तरह ही दिखती है।

इसके पश्चात इस में खारिश होनी शुरू हो जाती हैं। इसीलिए क्रैडल कैप नाम की बीमारी का इलाज करना काफी जरूरी होता हैं, क्योंकि सिर पर पपड़ी जम जाने के कारण दूसरा व्यक्ति आपके बच्चे को देखकर यह सोचता है कि शायद शिशु के माता-पिता बच्चे का अच्छी तरह ख्याल नहीं रखते होंगे, इसी वजह से बच्चे के सिर की त्वचा पर इस प्रकार पकड़ी जम रही हैं।

Cradle Cap Disease In Hindi

क्रैडल कैप के लक्षण – Symptoms Of Cradle Cap Disease In Hindi ?

क्रैडल कैप बीमारी के बहुत से लक्षण हैं जिन्हें देखकर इस बीमारी का अंदाजा लगाया जा सकता है जैसे कि :-

  • क्रैडल कैप ऐसी स्थिति होती है जिसमें किसी के सिर पर सफेद या पीले रंग की पपड़ी जम जाती हैं, जिसे देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आपके बच्चे को क्रैडल कैप नाम की बीमारी हुई है और फिर आप जल्दी इसका इलाज शुरू कर सकते हैं।
  • जरूरी नहीं है कि यह सफेद और पीले रंग की ही हो कहीं बाहर यह बच्चे की त्वचा पर भी निर्भर करता है की पपड़ी कैसी हैं, लेकिन पपड़ी को देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं।
  • इस बीमारी में शिशु के सिर की त्वचा पर पपड़ीदार चकत्ते भी उभरने लगते हैं, जो कि दिखने में बिल्कुल कि बेकार होते हैं और उन्हें देख कर आपका मन भी खराब होगा। इस प्रकार की स्थिति में आपको अपने बच्चे से संबंधित कोई भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और तुरंत उसे त्वचा के डॉक्टर के पास दिखाना चाहिए।
  • क्रैडल कैप बीमारी में बच्चे के सील की ऊपरी त्वचा में पड़ी दार पैच बन जाते हैं और धीरे-धीरे यह एक मोटी परत में बदल जाती है जोकि दिखने में बेहद भद्दी लगती है धीरे-धीरे बच्चा भी इस पपड़ी के कारण परेशान होने लगता हैं।
  • जब इस बीमारी की शुरुआत होती हैं, तो शुरुआत में बच्चे के बालों में डैंड्रफ की तरह सफेद सफेद सा कुछ देखने को मिलेगा जोकि दिखने में डैंड्रफ की तरह ही होगा। लेकिन इसमें बच्चे को सिर की खोपड़ी में काफी ज्यादा खारिश होती है जिसकी वजह से बच्चा बाहर बार अपने सिर पर खारिज करने की भी कोशिश करता है लेकिन उसकी यह कोशिश नाकाम रहती हैं। आप बच्चे की इस हरकत को देखकर आसानी से पहचान सकती हैं कि उसके सिर पर पकड़ी जमी हुई हैं।
  • अगर आप अपने बच्चे की सिर की त्वचा पर तेल लगा रही हैं, तो तेल लगाने के पश्चात पपड़ी में से कुछ मिट्टी जैसे कण उसके कपड़ों पर गिरने लगेंगे और यह आपके हाथों पर भी लगने लगेंगे। खासतौर पर जब आप अपने बच्चे की सिर की मालिश कर रही होती हैं तो सिर की मालिश करते समय भी आपको कुछ ऐसा ही महसूस हो सकता हैं, जो कि आपको देखने में डैंड्रफ की तरह लगेगा लेकिन यह डैंड्रफ से काफी भिन्न होता हैं।
  • अगर आप अपने बच्चे को नहला रही हैं या फिर आपका बच्चा ऐसे ही लेटा हुआ है और आपको उसके सिर की त्वचा काफी ज्यादा लाल दिखाई देती हैं, तो लाल तो अच्छा भी सिर पर पपड़ी जमने का ही लक्षण होता हैं, क्योंकि सिर पर पपड़ी जमने से पहले सिर की त्वचा काफी लाल होने लगती हैं। इसीलिए जब बच्चे की सिर की त्वचा लाल रहती हैं, तो तभी आपको बच्चे पर घरेलू नुस्खे इस्तेमाल करनी चाहिए, क्योंकि घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करने से भी अपनी का इलाज 100% किया जा सकता हैं।

नवजात शिशु के सिर पर पपड़ी जमने के कारण – Causes Of Cradle Cap In Hindi ?

बच्चों के सिर पर पपड़ी जमने के अनेकों कारण होते हैं, अगर हम इन कारणों पर थोड़ा सा भी ध्यान दे ले तो सिर पर पपड़ी जमने से आसानी से रोका जा सकता है जैसे कि :-

अगर बच्चे की माता बच्चे की स्वच्छता पर ध्यान नहीं देती तो उसके कारण शिशु के सिर पर पपड़ी जम सकती है क्योंकि जब बच्चा गंदा रहता हैं, तो गंदगी में इस प्रकार की बीमारियां बच्चे को हो ही जाती हैं। इसीलिए बच्चे की माता को बच्चे की स्वच्छता पर काफी ज्यादा ध्यान देना चाहिए क्योंकि छोटे बच्चों की त्वचा काफी संवेदनशील होती हैं, जो कि आसानी से ही किसी भी बैक्टीरिया के संपर्क में आ सकती हैं।

अगर बच्चे की माता को कोई बीमारी है और वह एंटीबायोटिक दवाइयां ले रही है, तो एंटीबायोटिक दवाइयों के परिणाम स्वरुप उसके बच्चे के सिर की त्वचा पर पपड़ी जनशक्ति हैं, क्योंकि antibiotics Medicine के कारण आपका बच्चा भी प्रभावित होता हैं, क्योंकि शिशु माता के दूध से ही जीवित रहता है और यदि वह माता का दूध पिएगा तो दूध के कारण प्रभावित भी होगा।

कई बार कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट के कारण भी बच्चे के सिर की त्वचा पर पपड़ी जम सकती हैं, क्योंकि छोटे बच्चों को काफी जल्दी किसी भी दवाई का साइड इफेक्ट हो जाता है, इसीलिए बच्चों को सोच समझकर ही दवाइयां देनी पड़ती हैं।

अगर आपका बच्चा फंगल इंफेक्शन से संक्रमित हो जाता हैं, तो फंगल इंफेक्शन से संक्रमित हो जाने के पश्चात भी आपके बच्चे को Cradle Cap नाम की बीमारी हो सकती है, क्योंकि फंगल इन्फेक्शन भी बच्चे की त्वचा को प्रभावित कर सकता हैं।

अगर आपका बच्चा किसी हानिकारक बैक्टीरिया के संपर्क में आता हैं, तो उसके संपर्क में आने के कारण भी बच्चे को बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता हैं। इसीलिए बच्चों को साफ सुथरा रखना चाहिए और अपने घर पर भी पूरी साफ सफाई रखनी चाहिए जिसके कारण बच्चे को बैक्टीरियल इंफेक्शन होने का खतरा ना रहें।

जब शिशु की त्वचा में नमी ख़त्म हो जाती हैं, तो उसके कारण भी शिशु के सिर की त्वचा पर पपड़ी जम सकती हैं, क्योंकि छोटे बच्चों की त्वचा को नमी की बहुत ज्यादा आवश्यकता होती हैं। यदि ऐसे में त्वचा की नमी ही खत्म हो जाए तो उन्हें बचपन में ही त्वचा से संबंधित बीमारी होना आम बात हैं। इसीलिए छोटे बच्चों को पानी पिलाना भी काफी आवश्यक होता हैं, क्योंकि पानी पीने से बच्चों की त्वचा में नमी बनी रहती हैं।

अगर आप शिशु के जन्म से ही शिशु के सिर की मालिश नहीं करते, तो सिर की मालिश ना करने के कारण भी बच्चे के सिर पर पपड़ी जम सकती हैं, क्योंकि सिर की मालिश करने से बच्चे की सिर की त्वचा में पूरी तरह नमी बनी रहती है और अगर सिर की त्वचा की नमी खत्म हो जाए, तो फिर तो सिर पर पपड़ी जम ही जाती हैं।

  • यह एक अनुवांशिक बीमारी भी हो सकती हैं। अगर आपसे बड़े भाई-बहनों के इस प्रकार की बीमारी हुई है या फिर आपके माता-पिता को Cradle Cap नाम की बीमारी थी तो फिर इस बात के अधिक चांस होते हैं कि यह आपको भी हो सकती हैं।

क्रैडल कैप बीमारी का परीक्षण – Diagnosis Of Cradle Cap In Hindi ?

Cradle Cap Disease In Hindi

अगर किसी भी शिशु को यह बीमारी हो जाती हैं, तो सबसे पहले तो माताओं को अपने आप ही पपड़ी को ठीक करने के लिए कुछ तरीके अपनाने चाहिए अगर फिर भी यह बीमारी सही नहीं हो रही हैं, तो इसका इलाज डॉक्टर के द्वारा ही किया जा सकता हैं। जब आप डॉक्टर के पास इस बीमारी से संबंधित बात करने के लिए जाते हैं, तो वह आपके शिशु की त्वचा के कई हिस्सों की जांच भी कर सकता हैं।

इसके अतिरिक्त डॉक्टर आपकी शिशु का खून भी टेस्ट कर सकता है खून का टेस्ट इसलिए किया जाता हैं, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि बच्चे को किसी प्रकार का कोई संक्रमण तो नहीं है अगर बच्चे को संक्रमण होता हैं, तो उस संक्रमण का इलाज किया जाता है अन्यथा आपके शिशु के सिर की बचा की पूरी तरह से जांच की जाती है।

नवजात शिशु के सिर पर पपड़ी जमने से कैसे बचाएं – Prevention Tips Of Cradle Cap In Hindi ?

अगर आप अपने शिशु के सिर पर पपड़ी जमने से रोकना चाहते हैं, तो आपको बहुत से तरीकों को आजमाना होगा जैसे कि :-

1. बेबी शैंपू से सिर धोएं

अगर आप अपने बच्चे के सिर पर पपड़ी जमने से बचाना चाहती हैं, तो आपको बच्चे को स्नान करवाते समय उसका फिर भी शैंपू से धोना चाहिए और आपको अपने बच्चे का सिर धोने के लिए बेबी शैंपू का इस्तेमाल करना चाहिए अगर आपने लाते समय बच्चे का सिर शैंपू से धोती हैं, तो फिर बच्चे के सिर की गंदगी पूरी तरह साफ हो जाती है जिससे बच्चे के सिर की त्वचा पर पपड़ी जमने का खतरा नहीं रहता।

2. नमी बनाए रखें

आपको अपने बच्चे की सिर की त्वचा के अंदर नमी बनाए रखनी चाहिए। नमी बनाए रखने के लिए आप रोजाना बच्चे की सिर की मालिश भी कर सकती हैं यदि आप बच्चे की सिर की मालिश अच्छी तरह करती हैं, तो फिर बच्चे को आसानी से इस बीमारी से बचाया जा सकता हैं।

3. स्वच्छता बनाए रखें

आपको अपने बच्चे के आसपास और अपने घर में पूरी तरह से स्वच्छता बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि स्वच्छता ना बनाए रखने के कारण आपका बच्चा किसी बैक्टीरिया की चपेट में भी आ सकता है, जिसकी वजह से उसे संक्रमण हो सकता है। इसीलिए बच्चे को भी पूरी तरह से स्वच्छ रखें ताकि उसे किसी भी प्रकार की बीमारी का खतरा ना रहे।

4. शिशु की माता ध्यान रखें

शिशु की माता को भी अपने खाने-पीने का पूरा ध्यान रखना चाहिए, यदि वह कोई दवाई खा रही हैं, तो वह दवाई खाने से पहले उसे एक डॉक्टर से अच्छी तरह पूछ लेना चाहिए कि वह अपने शिशु को स्तनपान कराती है, अगर वह दवाई का सेवन करें तो क्या उसके लिए सही रहेगा या नहीं यदि महिलाएं डॉक्टर से पूछ लेंगे तो वह अपने शिशु को दवाइयों के कारण होने वाले साइड इफेक्ट से भी बचा पाएंगी।

5. शिशु के कपड़े बदले

आपको अपने शिशु के कपड़े रोजाना बदलने चाहिए क्योंकि गंदे कपड़ों की वजह से भी कई बार शिशु को एलर्जी हो जाती हैं।। इसलिए शिशु के कपड़ों को बदलना काफी ज्यादा आवश्यक होता है आपका बच्चा दिन में 5 से 6 बार पेशाब करता है और बच्चा जब भी पेशाब करता है तो कपड़ों में ही करता हैं।

इसीलिए आपको हर बार अपने बच्चे को धुले हुए कपड़े पहनाने चाहिए। आपका बच्चा जब भी पेशाब करता है तो तुरंत ही उसके कपड़े बदलकर दूसरे कपड़े पहना देना चाहिए। इस प्रकार आपका बच्चा इन छोटी-मोटी बीमारियों से बचा रहेगा।

नवजात शिशु के सिर पर पपड़ी जमने का इलाज – Treatment Of Cradle Cap In Hindi ?

  • अगर आप नवजात शिशु को सिर पर पगड़ी जमने पर डॉक्टर के पास लेकर जाती हैं, तो डॉक्टर बच्चे की परिस्थिति के हिसाब से आपको दवाई दे सकता है वैसे तो डॉक्टर बच्चों को खाने की दवाइयां बहुत कम देता हैं। ज्यादातर डॉक्टर बच्चे की माता को बच्चे की सिर की त्वचा पर लगाने वाली दवाइयां भी देता है जिसमें क्रीम तथा लोशन शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त डॉक्टर आपको कुछ ऐसा अलग तेल भी बता सकता है जिससे बच्चे की मालिश करने पर सिर की पपड़ी ठीक होने लगेगी।
  • इसके अतिरिक्त डॉक्टर बच्चे की जांच करके बीमारी के हिसाब से भी दवाइयां दे सकता हैं। सबसे पहले तो बीमारी की जांच करनी आवश्यक होती है क्योंकि बीमारी के हिसाब से ही दवाइयां दी जाती हैं, कई बार हमें बीमारी दिखने में बहुत छोटी लगती है लेकिन वह कोई दूसरी ही बीमारी होती है।

क्रैडल कैप बीमारी की जटिलताएं – Complication’s Of Cradle Cap Disease In Hindi ?

अगर इस बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया हैं, तो यह बच्चे का और भी ज्यादा नुकसान कर सकती है जैसे कि :-

  • इस बीमारी के कारण आपके बच्चे के सिर की त्वचा पूरी तरह से लाल भी हो सकती है, जिसकी वजह से पूरी त्वचा में बहुत ज्यादा खुजली होगी और बच्चे को काफी ज्यादा जलन भी महसूस होगी जिसकी वजह से वह काफी ज्यादा रोएगा, क्योंकि बच्चे इस प्रकार का दर्द बिल्कुल भी महसूस नहीं कर सकतें।
  • अगर यह बीमारी बढ़ जाए तो फिर सिर की त्वचा से होती होती। यह बच्चे के चेहरे को भी प्रभावित कर सकती है और बच्चे की चेहरे की त्वचा भी धीरे-धीरे खराब होने लगेगी और फिर इसी तरह धीरे-धीरे यह पूरी त्वचा पर फैल जाएगी, इसलिए शुरुआत में ही इसका इलाज जरूरी हैं़
  • इस बीमारी के कारण धीरे-धीरे बच्चे के कान में भी फंगल इंफेक्शन हो सकता है। इसीलिए इस बीमारी को शुरुआत में ही रोक देना चाहिए, क्योंकि जब भी है सिर से नीचे पहुंच जाती हैं, तो फिर इस को काबू में करना काफी मुश्किल हो सकता हैं।
  • जब यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है तो यह दूसरे व्यक्तियों में भी चल सकती हैं, क्योंकि यह बीमारी किसी संक्रमण के कारण भी बच्चे को हो सकती है और संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में काफी जल्दी फैलते हैं।
Cradle Cap Disease In Hindi
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Newborn Babies Vaccination: शिशु को कौन से टीके लगवाना आवश्यक हैं – जानिए जन्म के पश्चात शिशु का टीकाकरण क्यों आवश्यक हैं ?

क्रैडल कैप बीमारी का घरेलू इलाज – Home Remedies For Cradle Cap Disease In Hindi ?

सिर पर पपड़ी जमने पर इसका घरेलू इलाज भी किया जा सकता हैं, जो कि काफी फायदेमंद सिद्ध हो सकता है जैसे कि :-

1. नारियल का तेल ( Coconut Oil )

नारियल का तेल त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें anti-fungal तथा anti-bacterial गुण होते हैं, जो कि त्वचा पर पपड़ी जमना में बेहद फायदेमंद साबित होते हैं, अगर आपके बच्चे के सिर की त्वचा पर पपड़ी जम गई है तो आप इसे ठीक करने के लिए पपड़ी जमे हुए स्थान पर नारियल का तेल लगा सकते हैं। यदि आप रात के समय नारियल का तेल लगाते हैं, तो आपका बच्चा जल्दी ठीक होने लगेगा।

2. पेट्रोलियम जेली ( Petroleum Jelly )

शिशु के सिर की त्वचा की पपड़ी को ठीक करने के लिए पेट्रोलियम जेली भी बेहद फायदेमंद होती है क्योंकि यह नमी बनाए रखने के लिए काफी फायदेमंद होती है। इसलिए आप अपने शिशु के सिर की त्वचा पर पेट्रोलियम जेली लगा सकती हैं। इस प्रकार भी आपके बच्चे की त्वचा को काफी राहत पहुंचेगी।

3. जैतून का तेल ( Olive oil )

आप अपने बच्चे के सिर की मालिश जैतून के तेल से भी कर सकती हैं। इसके अतिरिक्त आप पपड़ी जमे हुए स्थान पर भी जैतून के तेल को दिन में दो से तीन बार लगा सकती हैं, क्योंकि जैतून का तेल औषधीय गुणों से भरपूर होता है जो की अनेकों प्रकार की त्वचा संबंधित बीमारियों में लाभकारी सिद्ध होता हैं। इसीलिए बच्चे को इस प्रकार की बीमारी होने पर जैतून के तेल का इस्तेमाल करें।

4. सरसों का तेल ( Mustard Oil )

आप अपने बच्चे के सिर की त्वचा से पपड़ी को हटाने के लिए सरसों के तेल का इस्तेमाल भी कर सकती हैं, अगर आपने बच्चे की त्वचा पर सरसों का तेल लगाती है या फिर सरसों के तेल से मालिश करती हैं, तो इस प्रकार भी आपके बच्चे की त्वचा काफी जल्दी ठीक होने लगती है।

5. एवोकाडो का तेल ( Avocado Oil )

आप अपने बच्चे के सिर की त्वचा को ठीक करने के लिए एवोकाडो के तेल की मसाज भी कर सकती हैं या फिर आप अपने बच्चे के सिर की त्वचा पर एवोकाडो का तेल भी लगा सकती हैं और उसे पूरी रात लगाकर छोड़ सकती हैं। इस प्रकार भी आपके बच्चे की त्वचा काफी जल्दी ठीक हो जाएगी।

7. शुद्ध देसी घी

आप अगर इन नुस्खों में से कोई भी नुस्खा नहीं आजमाना चाहते तो आप अपने बच्चे के सिर की त्वचा के प्रभावित हिस्से पर देसी घी भी लगा सकती हैं, क्योंकि देसी घी एक औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता हैं। इसीलिए आप अपने बच्चे की त्वचा पर देसी घी भी लगा सकती हैं यदि आप दिन में तीन से चार बार अपने बच्चे की त्वचा पर देसी ही लगाती हैं, तो इस प्रकार भी उसकी त्वचा बिल्कुल सही हो जाएगी।

Conclusion –

शिशु के सिर पर सफेद पपड़ी होने के क्या कारण होते हैं और शिशु को सिर की त्वचा पर सफेद पपड़ी जमने से किस प्रकार नुकसान पहुंच सकता हैं। इस बात के बारे में भी हमने आपको बताया है आप अब हमारी इस पोस्ट को पढ़ने के बाद शिशु की सिर की त्वचा से आसानी से पपड़ी को हटा सकते हैं।

आज की पोस्ट के माध्यम से हमने आपको Treatment Of Cradle Cap In Hindi तथा Prevention Tips Of Cradle Cap In Hindi के बारे में बताया हैं। इसी के साथ-साथ हमने आपको Cradle Cap Causes In Hindi तथा Symptoms Of Cradle Cap In Hindi के बारे में भी बता दिया हैं, ताकि आप उन लक्षणों को देखकर आसानी से अपने बच्चे का इलाज कर सकें। अगर अब भी आप को Complication Of Cradle Cap In Hindi के बारे में हम से पूछना हो तो कमेंट सेक्शन में कमेंट करें। धन्यवाद

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