Diet Chart : नवजात शिशु को कब खाना खिलाना शुरू करना चाहिए – जानिए 6 महीने के बच्चे को कितनी मात्रा में खाना खिलाना चाहिए ?|When should you start feeding a newborn baby – know how much food should be fed to a 6-month-old baby in Hindi?

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Dr. Arti Sharma
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Dr. Arti Sharma is a certified BAMS doctor with at least 2 years of article writing experience on various medication and therapeutic lines. She is known for her best work in ayurvedic medication knowledge and there uses. Her hobbies including reading books and writing articles. With a good grip in sports, she uses to play for her university cricket team as a captain. Her work for ayurvedic is well known. डॉ आरती शर्मा एक प्रमाणित BAMS डॉक्टर है जिन्हे कम से कम 2 साल का विभिन्न दवाइयों और चिकित्सीय रेखाओं पर लेखन का अनुभव है। वह आयुर्वेदिक दवाओं के ज्ञान और उनके उपयोग में अपने बेहतरीन काम के लिए जानी जाती हैं। उनका शौक किताबें पढ़ना और लिखना है। खेलों में अच्छी पकड़ के साथ, वह एक कप्तान के रूप में अपनी विश्वविद्यालय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुकी हैं। आयुर्वेद के क्षेत्र में उनका काम अच्छी तरह से जाना जाता है।

Diet Chart : नवजात शिशु को कब खाना खिलाना शुरू करना चाहिए – जानिए 6 महीने के बच्चे को कितनी मात्रा में खाना खिलाना चाहिए ?

बच्चे के जन्म के पश्चात शुरुआती 6 महीनों तक बच्चे को सिर्फ मां का दूध ही पीना चाहिए क्योंकि मां का दूध बच्चे के लिए बहुत ज्यादा आवश्यक होता हैं, जो बच्चे ज्यादा लंबे समय तक मां का दूध पीते हैं, तो वह बच्चे दूसरे बच्चों की अपेक्षा ज्यादा फुर्तीलें तथा शक्तिशाली होते हैं, क्योंकि मां का दूध पीने से छोटे बच्चों के शरीर में सभी पोषक तत्व की कमी पूरी हो जाती है

इसीलिए छोटे बच्चों को कम से कम 6 महीने तक तो मां का दूध पीना ही चाहिए और 6 महीने के पश्चात भी माता को बच्चे को दूध पिलाना नहीं छोड़ना चाहिए लेकिन दूध के साथ-साथ बच्चे को और भी बहुत सी खाने की चीज दी जा सकती हैं जिससे कि उसको विकास में काफी मदद मिलेगी।

जब बच्चे को शुरुआती दिनों में खाना खिलाना शुरू किया जाता है, तो उस समय बच्चे का ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है और बहुत सी सावधानियां बरतनी पड़ती है क्योंकि थोड़ी सी भी लापरवाही के कारण बच्चे का स्वास्थ्य तुरंत ही खराब हो सकता हैं।

इसीलिए आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपको Diet Chart Baby Food After 6 Month In Hindi तथा Healthy Food For Baby In Hindi के बारे में बताएंगे। इसी के साथ-साथ हम आपको Bache Ko Khana Khilana Kab Suru Kare तथा Diet Chart For Baby After 6 Month In Hindi के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताएंगे, ताकि आप अपने बच्चे के खाने से संबंधित कोई भी लापरवाही ना बरतें।

बच्चे को कब खाना खिलाना शुरू करें -  Diet Chart  and When to Start Feeding Baby In Hindi ?

बच्चे को कब खाना खिलाना शुरू करें – Diet Chart and When to Start Feeding Baby In Hindi ?

विशेषज्ञों का यह मानना है कि बच्चे के जन्म के पश्चात शिशु को 6 महीने तक तो माता का दूध ही पिलाना चाहिए, क्योंकि 6 महीने तक अगर बच्चा माता का दूध पी लेता हैं तो उसका विकास अच्छे से होता हैं। इसके अतिरिक्त आप 6 महीने के पश्चात बच्चे को दूध के अतिरिक्त और भी बहुत सी खाने की चीजें दे सकती हैं लेकिन 6 महीने के पश्चात भी आपको अपने बच्चे को ठोस आहार देने से बचना चाहिए।

क्योंकि अभी आपके बच्चे को खाना निंगलना नहीं आता जिसकी वजह से खाना आपके बच्चे के गले में भी फंस सकता हैं इसलिए आपको शुरुआत में सोच समझकर ही खाना देना पड़ता हैं।

6 महीने के बाद भी जब आप बच्चे को खाना देना शुरू करती हैं, तो आपको सभी चीजों को तरल रूप में ही बच्चे को खिलाना पड़ता हैं, क्योंकि अभी आपको धीरे-धीरे अपने बच्चे को खाना खिलाना सिखाना है धीरे-धीरे आपका बच्चा भोजन खाना सीखता है। जब बच्चा 6 महीने का हो जाता हैं, तो वह खुद ही खाद्य पदार्थों की तरफ अपनी रुचि प्रकट करने लगता है क्योंकि अब आपका बच्चा भी बहुत चीजें खाने के बारे में सोचता है जो कि आप खा रहे हैं आपने अक्सर देखा होगा कि यदि आप किसी छोटे बच्चे के सामने बैठ कर खाना खा रहे हैं, तो वह सब काम छोड़कर सिर्फ आपको ही देखने लगता हैं।

6 महीने के बच्चे को कितनी मात्रा में खाना खिलाना चाहिए – How much food should be Given to a 6 Month Old Baby in Hindi ?

6 महीने के बच्चे को जब आप शुरुआत में खाना खिलाना शुरू करते हैं, तो उस समय उसे तरल रूप में 5 से 10 मिलीलीटर या साधारण भाषा में कहीं तो एक से दो चम्मच खाना खिलाना होगा। इसके पश्चात आप धीरे-धीरे अपने बच्चे की आदत के हिसाब से खाने की खुराक बढ़ा भी सकते हैं। शुरुआत में तो आपका बच्चा एक चम्मच खाना ही मुश्किल से खा पाएगा लेकिन आप उसके साथ बिल्कुल भी जबरदस्ती ना करें मैं जितना खाता है उसको उतना ही खाने दें।

आप शुरुआत में अपने बच्चे को केले को अच्छी तरह पीसकर उसमें थोड़ा सा दूध मिलाकर उसे एक घोल की तरह कर लीजिए और फिर आप इस गोल की एक चम्मच अपने बच्चे को खिला सकते हैं। इसी प्रकार आप दूसरे कुछ फलों की प्यूरी अपने बच्चे को खिला सकते हैं।

शुरुआत में आपको अपने बच्चे के साथ बिल्कुल भी जबरदस्ती नहीं करनी क्योंकि अभी आपके बच्चे ने खाना शुरू ही किया है। यदि आप उसको ज्यादा खाना खिलाते हैं तो इसके कारण वह बीमार भी हो सकता है और बीमार होने के कारण उसे दस्त भी लग सकते हैं या उल्टियां भी हो सकती हैं इसके अतिरिक्त उसका पेट दर्द भी हो सकता है।

इसलिए आप को अपने बच्चे को ठोस आहार देने से बचना होगा तो की शुरुआत में बच्चे को खाने को हजम करने में काफी देर लगती हैं, क्योंकि आपके बच्चे के पाचन तंत्र में ठोस खाना पचाने की क्षमता अभी नहीं होती लेकिन आने वाले कुछ महीनों में धीरे-धीरे यह क्षमता बढ़ जाएगी। बच्चे को खाना खिलाते समय इस बात का ध्यान रखें कि जबरदस्ती अपने बच्चे के मुंह में खाना डालने की आवश्यकता नहीं है।

यदि आपका बच्चा एक बार मुंह में से खाना निकाल रहा है तो जबरदस्ती ही उसके मुंह में खाना ना डालें, क्योंकि इस वजह से खाना उसके गले में फंस सकता है जिसके कारण उसे सांस लेने में दिक्कत हो सकती है और उसका दम घुट सकता है।

6 महीने के बच्चे का डाइट चार्ट – Diet Chart For 6 Months Baby In Hindi ?

6 महीने के बच्चे के डाइट चार्ट के बारे में पता होना काफी आवश्यक है कभी उसी के हिसाब से आप अपने बच्चे को खाना खिला सकती हैं और उसकी सेहत का पूरा ख्याल रख सकती हैं, तो चलिए Diet Chart For 6 Month Baby In Hindi के बारे में हम जान लेते हैं।

6 महीने के बच्चे को सुबह उठने के बाद मां का दूध ही पिलाना चाहिए। यदि उसकी मां उसे अपना दूध नहीं मिला पा रही है तो उसे डिब्बे वाला दूध भी पिलाया जा सकता है। सुबह उठते ही यदि उसे दूध पिलाया जाए तो यह उसके शरीर के लिए अच्छा रहता है।

सुबह दूध पिलाने के बाद आप अपने बच्चे को नाश्ते में मैश किया हुआ सेब, पपीता, केला आदि खिला सकती हैं या फिर फलों की प्यूरी, गाजर की प्यूरी, मसला हुआ केला, उबला हुआ आलू आदि भी नाश्ते में खिलाया जा सकता है।

नाश्ते के बाद बच्चे को कम से कम 2 घंटे के लिए सुला देना चाहिए और जब आपका बच्चा सो कर उठे तो दोपहर में आप अपने बच्चे को दूध पिलाने के 1 घंटे बाद मैश किया हुआ केला, चावल या दलिया, मूंग की दाल का सूप आदि खिला सकती हैं, क्योंकि यह सब पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और बच्चे के शरीर के लिए भी फायदेमंद रहते हैं और यह बच्चे को आसानी से हजम हो जाते हैं। इसीलिए आप दोपहर के खाने के तौर पर यह सब बच्चे को खिला सकती हैं।

दोपहर के खाने के पश्चात भी आपको अपने बच्चे को कम से कम 2 से 3 घंटे के लिए सुला देना चाहिए और जब वह सो कर उठे तो तुरंत उसकी माता को उसे दूध पिलाना चाहिए।

दूध पिलाने के पश्चात आप शाम के समय बच्चे को दाल का पानी या फिर मैश किया हुआ केला पपीता या मैश की हुई सेब खिला सकते हैं। यदि आपका बच्चा शाम के वक्त किया है सब चीजें नहीं खा पा रहा है, तो आपको उसके साथ जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए और उसे दूध पिला देना चाहिए यदि आपका बच्चा शाम के वक्त सिर्फ दूध भी पीता है तो भी उसके लिए काफी है।

रात के समय 6 महीने के बच्चे को ऐसा कुछ भी नहीं खिलाना चाहिए जो कि वह हजम ना कर पाए, आप उसे सिर्फ अपना दूध पिला कर सुला सकती हैं या फिर आप उसे गाय का दूध जैसी डिब्बे वाला दूध पिला कर भी सुला सकती हैं। रात के समय यदि आप बच्चे को कुछ खिला देती हैं, तो उसे हजम करने में परेशानी हो सकती है इसीलिए बच्चे को सिर्फ दूध पिला कर ही सुला दें।

6 महीने के बच्चे को खाने से एलर्जी होने पर क्या करें - What to Do if a 6 Month old Baby is Allergic to Food In Hindi ?
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अब बच्चा धीरे-धीरे बड़ा हो रहा होता है इसीलिए एक बेहतर विकास के लिए और शरीर में पोषक तत्वों की कमी पूरी करने के लिए बच्चे को पानी की भी बहुत ज्यादा आवश्यकता होती हैं। इसलिए आपको अपने बच्चे को अब रोजाना 4 से 5 बार पानी भी पिलाना चाहिए। यदि आप उसे चम्मच से थोड़ा-थोड़ा पानी भी पिलाती है तो वह भी उसके लिए काफी होता है। इस प्रकार बच्चे के शरीर में पानी की कमी पूरी हो जाती है और समय के साथ-साथ उसका अच्छा विकास होता है।

6 महीने के बच्चे को खाने से एलर्जी होने पर क्या करें – What to Do if a 6 Month old Baby is Allergic to Food In Hindi ?

बहुत बार ऐसा भी होता है कि जब आप अपने छोटे बच्चे को 6 महीने का होने के बाद खाना खिलाना शुरू करती हैं, तो उस समय उसे खाना खाने की वजह से एलर्जी भी हो जाती है जैसे कि शिशु को दस्त उल्टी लग जाती हैं या कब्ज की समस्या हो जाती हैं। इसके अतिरिक्त पेट में भी दर्द हो सकता है और कभी-कभी तो खाने की वजह से एलर्जी के रूप में उसकी त्वचा पर भी रैशेज या लाल-लाल दाने हो जाते हैं

इस प्रकार के लक्षण यदि आपको भी अपने शिशुओं में दिखाई दे रहे हैं तो उसे तुरंत खाना देना बंद कर देना चाहिए और उसे कुछ दिन लगातार दूध ही पिलाना चाहिए। अगर फिर भी बच्चे के शरीर में एलर्जी के लक्षण कम नहीं होते, तो उस परिस्थिति में बच्चे को तुरंत ही बच्चों के डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए और डॉक्टर को बच्चे की हालत के बारे में सारी जानकारी देनी चाहिए और यह भी बताना चाहिए कि अपने बच्चे को क्या खिलाया था।

क्योंकि डॉक्टर के लिए जानना जरूरी है कि आपने बच्चे को क्या खिलाया था क्योंकि कहीं बाहर बहुत सी चीजें ऐसी होती है जो बच्चे को नहीं खिलानी होती लेकिन आपको ना पता होने के कारण आप बच्चे को वह चीजें खिला देते हैं जिसके कारण बच्चे को एलर्जी हो जाती है।

इसीलिए हम तो आपको यही कहेंगे कि जब भी आपको बच्चे को खाना खिलाना शुरू करें, तो उससे पहले एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य ले लें, क्योंकि बहुत से बच्चों के शरीर में पोषक तत्व की कमी भी होती है जिसके चलते उन्हें मां का दूध ज्यादा से ज्यादा पिलाना पड़ता है या फिर कमजोर बच्चों को भी मां का दूध पिलाने के साथ-साथ उनका ख्याल काफी ज्यादा रखना पड़ता हैं।

6 महीने के बच्चे को खाना खिलाते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए – What Should be Taken Care of while Feeding a 6 Month Old Baby In Hindi ?

छोटे बच्चों को खाना खिलाते समय उनकी माता को बहुत सी चीजों का ख्याल रखना पड़ता है। बहुत सी चीजें ऐसी होती हैं जिनके कारण बच्चों को तुरंत ही नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए उनकी माता को बहुत सी सावधानियां बरतनी होगी जैसे कि :-

  • छोटे बच्चों को खाना खिलाने से पहले उनकी माता को अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए, क्योंकि कई बार हाथों पर बैक्टीरिया जमे रह जाते हैं और यही bacteria आपके बच्चे के मुंह में जाकर उसके शरीर में जाते हैं और फिर आपके बच्चे को infection कर सकते हैं। इसीलिए आपको अपने हाथों को पहले अच्छी तरह antibacterial साबुन से धोना चाहिए या hand wash से धोना चाहिए उसके पश्चात ही अपने बच्चे को खाना खिलाना चाहिए।
  • आपको अपने बच्चों को धीरे-धीरे खाना खिलाना चाहिए। यदि आप एकदम से ही उसे पूरी चम्मच भर कर खाना खिला देंगे तो वह उस खाने को नहीं निंगल पाएगा आपके बच्चे के गले में फंस सकता है जिसकी वजह से उसका दम भी घुट सकता है, इसलिए अपने बच्चों को बिल्कुल थोड़ा-थोड़ा खाना बहुत ही आराम से खिलाए।
  • जब आप बच्चों को खाना खिला रहे हो तो जो खाना बच्चों के मुंह में हैं पहले उसको अच्छे से उस खाने को खाने दीजिए और जब वह उस खाने को अच्छे से खा ले तो तभी उसके मुंह में खाने की दूसरी चम्मच देनी चाहिए।
  • बच्चे को जो खाना हमने आपको बताया है उसी में से खाना खिलाना है। यदि आप अपनी मर्जी से ही बच्चे को कोई तला हुआ खाना खिला देते हैं, तो उसकी वजह से उसका स्वास्थ्य तुरंत ही खराब हो सकता है इसीलिए इस बात का भी ख्याल रखें।
  • जब तक आपका बच्चा 1 साल का नाम हो जाए तब तक उसे भैंस का दूध भी ना पिलाए या फिर गाय का दूध भी पिला रहे हैं, तो गाय के दूध में पानी मिलाकर पिलाएं क्योंकि भैंस का दूध या फिर गाय का शुद्ध दूध बहुत ज्यादा भारी होता है जो कि बच्चों को हजम नहीं होता और उन्हें तुरंत ही दस्त लग सकते हैं, इसलिए बच्चों को सिर्फ डब्बे वाला दूध ही पिलाएं।
6 महीने के बच्चे को खाना खिलाते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए - What Should be Taken Care of while Feeding a 6 Month Old Baby In Hindi ?
  • आपको अपने बच्चे को सिर्फ मैश किए हुए फल ही देना चाहिए। यदि आप उसे सीधे ही कटे हुए फलों को खिला देती हैं तो इस प्रकार उसका दम घुट सकता है, इसीलिए बच्चे को हमेशा ही मैच किए हुए फल खिलानें चाहिए।
  • आपको अपने बच्चों को हमेशा किसी शांत जगह पर ही खाना खिलाना चाहिए अगर आप अपने बच्चे को किसी शोर वाले स्थान पर खाना खिलाते हैं, तो वह खाना नहीं खा पाएगा।
  • बच्चे को प्लास्टिक के बर्तन में कभी भी खाना नहीं खिलाना चाहिए, आपको अपने बच्चे को हमेशा स्टील के बर्तन में खाना खिलाना चाहिए यही उसके लिए बेहतर रहता हैं।
  • आपको अपने बच्चे को सिर्फ घर का खाना ही खिलाना चाहिए। आपको उसे बाजार का खाना कभी भी नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि अभी आपका बच्चा इस लायक नहीं हुआ है कि वह बाजार का खाना हजम कर सके।
  • आपको अपने छोटे बच्चे को कभी भी बाजार का जूस या cold drink आदि का सेवन नहीं करवाना चाहिए, क्योंकि इनमें chemical होते हैं और यह इतनी कम उम्र के बच्चे के लिए बहुत ही ज्यादा खतरनाक साबित हो सकते हैं। यहां तक की यह आपके छोटे बच्चे के लीवर पर भी बहुत ज्यादा बुरा असर डालते हैं।
  • जब आप अपने बच्चे का खाना बना रही होती हैं, तो बच्चे के खाने में किसी भी तरह का कोई मसाला नहीं होना चाहिए, क्योंकि मसालेदार खाना हम बच्चे को हजम नहीं होता और मसाले के साथ-साथ आपको नमक का भी ख्याल रखना चाहिए। यदि आप बच्चे के खाने में नमक ज्यादा डाल देंगे तो उसके कारण भी बच्चे के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता हैं।
  • बच्चे को खाना खिलाने के पश्चात उसे गोद में उठाकर डकार दिलानी चाहिए, क्योंकि बच्चे को डकार दिलाने बहुत आवश्यक होती है क्योंकि डकार लेने से यह पता लगता है कि बच्चे को अब खाना हजम हो चुका हैं।
  • बच्चे को खाना खाने से एलर्जी भी हो सकती है इसीलिए आपको यदि ऐसा लगता है कि आपके बच्चे को खाना खाने से एलर्जी हो रही है, तो आपको तुरंत ही खाना रोक देना चाहिए और डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  • अगर बच्चे को खाना खिलाते समय उसके गले में खाना फस जाता है, तो आपको आराम से उसकी कमर पर थपथपाना चाहिए इस प्रकार बच्चे के गले से खाना नीचे उतर जाएगा।

Conclusion –

छोटे बच्चे के खाने पीने का ख्याल रखना बहुत जरूरी होता हैं, क्योंकि छोटी मोटी चीजों के कारण भी बच्चे का स्वास्थ्य तुरंत ही बिगड़ सकता हैं। इसीलिए आपको अपने बच्चे के खाने-पीने का काफी ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है बच्चे के विकास के लिए उसे दूध के अलावा भी अब बाकी चीजें खिलानी आवश्यक है। इसलिए 6 महीने के पश्चात् बच्चे को खाना खिलाना शुरू कर दिया जाता है

इसीलिए हमने आपको आज की इस पोस्ट के माध्यम से Baby Food After 6 Month In Hindi तथा Healthy Food For Baby In Hindi के बारे में बताया है। इसी के साथ-साथ हमने आपको Bache Ko Khana Khilana Kab Suru Kare तथा Diet Chart For Baby After 6 Month In Hindi के बारे में भी विस्तार से बता दिया हैं। अब यदि आपको हमसे Healthy Diet For 6 Month Baby In Hindi के बारे में कोई भी सवाल पूछना हो, तो कमेंट सेक्शन में कमेंट करके आप उनसे पूछ सकते हैं। धन्यवाद

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